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किसानों को शर्त मंजूर नहीं

नई दिल्ली।  दिल्ली की सीमा पर प्रदर्शन के लिए डटे किसानों ने बातचीत के लिए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की ओर से रखी गई शर्त ठुकरा दी है। किसानों ने कहा है कि वे बुराड़ी के निरंकारी ग्राउंड में प्रदर्शन के लिए नहीं जाएंगे। किसानों ने दो टूक अंदाज में कहा है कि वे दिल्ली की सीमा पर डटे रहेंगे या फिर उनको जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की इजाजत दी जाए। इस बीच किसानों का एक जत्था नरेला सीमा की तरफ से दिल्ली में घुसा है। अब किसान दिल्ली की पांच हाईवे जाम करके बैठने की तैयारी में हैं।

इसके साथ ही प्रदर्शनकारी किसानों ने रविवार को अपनी चार मांगें भी सरकार के सामने रखीं। किसानों की पहली मांग केंद्र के बनाए तीन कृषि कानूनों की वापसी की है। किसानों ने कहा है कि सरकार तत्काल तीनों कानून वापस ले। किसानों की दूसरी मांग न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी एमएसपी को अनिवार्य बनाने और इससे कम कीमत पर खरीद-बिक्री को गैरकानूनी बनाने का है। किसानों ने तीसरी मांग यह रखी है कि बिजली सुधारों को तत्काल रोका जाए। उनकी चौथी मांग पराली जलाए जाने पर जुर्माना लगाने के फैसले को खत्म करने की है।

इससे पहले रविवार को दिल्ली-हरियाणा सीमा यानी सिंघु और टिकरी बॉर्डर पर किसानों का प्रदर्शन जारी रहा। किसान संगठनों ने रविवार को बैठक की और बुराड़ी जाने से साफ इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि सरकार ने बातचीत के लिए शर्त रखी है, जो कि हमें मंजूर नहीं है। इसके साथ ही किसानों ने चेतावनी दी कि अब पांच हाईवे पर धरना देकर दिल्ली की घेराबंदी की जाएगी।

किसान नेता बलदेव सिंह सिरसा ने कहा- सरकार ने यह शर्त रखी थी कि हम हाईवे खाली कर बुराड़ी जाएं। शर्त अपमानजनक है। हम बुराड़ी मैदान में नहीं जाएंगे, क्योंकि वह ओपन जेल है। इसका सबूत भी है हमारे पास। उन्होंने कहा- उत्तराखंड के तेजिंदर सिंह विर्क की अगुआई में किसान दिल्ली के जंतर-मंतर जाना चाहते थे। दिल्ली के प्रशासन और पुलिस ने उनके साथ धोखा किया। उन्हें जंतर-मंतर न ले जाकर बुराड़ी पार्क में कैद कर दिया।

सिरसा ने कहा- हम ओपन जेल में जाने की बजाय सोनीपत, रोहतक के बहत्तर गढ़, जयपुर से दिल्ली हाईवे, मथुरा-आगरा से दिल्ली हाईवे, गाजियाबाद से आने वाला हाईवे जाम करेंगे और दिल्ली की घेराबंदी करेंगे। उन्होंने कहा कि किसान पांच जगहों पर धरना देंगे। सिरसा ने कहा- हमने रहने के लिए ट्रैक्टर-ट्रॉली को घर जैसा बना रखा है। हमारे पास इतना राशन है कि चार महीने भी हमें रोड पर बैठना पड़े, तो बैठ लेंगे। हम लंबे दौर की तैयारी करके आए हैं। किसानों ने कहा कि उन्होंने एक कमेटी बनाई है, जो धरने-प्रदर्शन का संचालन करेगी।

किसानों की ओर से यह भी कहा गया है कि किसी भी राजनीतिक दल को स्टेज पर बोलने की इजाजत नहीं है। कांग्रेस, आप या कोई भी राजनीतिक दल के किसानों के मंच पर भाषण नहीं देंगे। इनके अलावा दूसरे संगठनों के जो संचालन कमेटी के तय नियमों को मानेंगे, उन्हें बोलने की इजाजत दी जाएगी। इसके साथ ही किसानों ने यह भी कहा कि वे बुराड़ी में मौजूद अपने साथियों को वापस बुलाएंगे। गौरतलब है कि शनिवार को गृह मंत्री अमित शाह ने कहा था कि किसान बुराड़ी मैदान पर इकट्ठे हों। इसके बाद उनसे बात की जाएगी।

गृह सचिव ने की बातचीत की पेशकश

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की ओर से बातचीत की पेशकश किए जाने के एक बाद रविवार को गृह सचिव अजय भल्ला ने किसानों से बातचीत की पेशकश की। हालांकि किसान पहले ही अमित शाह के प्रस्ताव को ठुकरा चुके हैं। इसके बावजूद उन्हीं की बात दोहराते हुए केंद्रीय गृह सचिव अजय भल्ला ने पंजाब के 32 किसान संगठनों को जल्दी बातचीत के लिए दिल्ली के बुराड़ी बुलाया। उन्होंने अमित शाह के प्रस्ताव को दोहराते हुए कहा कि जैसे ही किसान बुराड़ी शिफ्ट होंगे, अगले ही दिन भारत सरकार विज्ञान भवन में किसानों के प्रतिनिधिमंडल और मंत्रियों के बीच चर्चा के लिए तैयार है।

गौरतलब है कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शनिवार को कहा था कि सरकार बातचीत के लिए तय दिन तीन दिसंबर से पहले भी किसानों से बातचीत के लिए तैयार है। इसके लिए उन्होंने शर्त रखी थी कि किसान बुराड़ी के संत निरंकारी ग्राउंड में पहुंचे। पर किसानों ने उनकी इस शर्त को अपमानजनक बताते हुए खारिज कर दिया है। उसके बाद किसान रविवार को पूरे दिन दिल्ली की अलग अलग सीमा पर डटे रहे और प्रदर्शन करते रहे। उनके प्रदर्शन को देखते हुए दिल्ली-हरियाणा सीमा पर भारी संख्या में सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं।

प्रदर्शनकारी किसानों ने हाईवे पर जगह जगह तंबू गाड़ लिए हैं और स्थायी धरने की तैयारी शुरू कर दी है। इसके साथ ही पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश से किसानों का आना भी रविवार को दिन भर जारी रहा। इस बीच दिल्ली के उत्तरी क्षेत्र के संयुक्त पुलिस आयुक्त सुरेंद्र यादव ने बताया कि किसान शांति से बैठे हैं और अब तक सहयोग कर रहे हैं। उन्होंने कहा- हमारा मकसद लॉ एंड ऑर्डर बनाए रखना है। साथ ही यह भी तय करना है कि आंदोलन करने वालों को कोई परेशानी न हो।

इस बीच किसानों के प्रदर्शन पर दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन ने कहा कि केंद्र सरकार किसानों के साथ बिना शर्त बात करे। इसमें कोई शर्त नहीं लगनी चाहिए। सरकार को बात तुरंत बात करनी चाहिए। उन्होंने कहा- किसान हमारे अन्नदाता हैं। वे जहां चाहें, उन्हें बैठने देना चाहिए। वे अपने घरों से कई सौ किमी दूर आए हैं, उनकी परेशानी देखनी चाहिए। वे खुशी से यहां नहीं आए। उन्हें लोकतंत्र में शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने का अधिकार है।

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