महंगाई साढ़े पांच साल में सबसे ज्यादा

नई दिल्ली। खुदरा महंगाई की दर बढ़ने का सिलसिला जारी है। दिसंबर में इसमें बड़ी बढ़ोतरी हुई है। दिसंबर महीने में खुदरा महंगाई की दर 7.35 फीसदी पहुंच गई, जो एक महीने पहले नवंबर में 5.54 फीसदी थी। केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय की ओर से सोमवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक खाने पीने की चीजों की महंगाई की वजह से खुदरा महंगाई की दर सात फीसदी से ऊपर गई है। यह केंद्र में नरेंद्र मोदी की सरकार बनने के बाद पिछले साढ़े पांच साल में सबसे ऊंची महंगाई दर है।

सांख्यिकी कार्यालय की ओर से सोमवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक सब्जियों खास कर प्याज की कीमतों में बढ़ोतरी की वजह से दिसंबर में खुदरा महंगाई दर ज्यादा प्रभावित हुई। खाने-पीने की चीजों की महंगाई दर बढ़ कर 14.12 फीसदी पहुंच गई। नवंबर में यह दर 10.01 फीसदी थी। गौरतलब है कि खुदरा महंगाई दर में खाने पीने की चीजों की हिस्सेदारी 50 फीसदी के आसपास है। तभी इसकी दर में बढ़ोतरी होने से मुद्रास्फीति की दर एकदम से ऊंची हो गई।

आरबीआई मौद्रिक नीति की समीक्षा में ब्याज दरें तय करते वक्त खुदरा महंगाई दर को ध्यान में रखता है। तभी माना जा रहा है कि अगली दोमासिक समीक्षा नीति में आरबीआई नीतिगत ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं करेगा। आरबीआई का लक्ष्य आमतौर पर खुदरा महंगाई दर चार से छह फीसदी के दायरे में रखने का होता है। यह जुलाई 2016 के बाद पहली बार छह फीसदी से ज्यादा यानी आरबीआई के अधिकतम लक्ष्य से ऊपर पहुंची है।

बैकिंग सेक्टर के जानकारों का कहना है कि खुदरा महंगाई छह फीसदी से ऊपर जाने की वजह से आरबीआई के प्रमुख ब्याज दर यानी रेपो रेट में कटौती की गुंजाइश काफी कम हो गई है। आरबीआई छह फरवरी को मौद्रिक नीति की समीक्षा के बाद ब्याज दरों का ऐलान करेगा। केंद्रीय बैंक ने पिछले साल रेपो रेट में 1.35 फीसदी की कमी की थी। गौरतलब है कि चुनिंदा वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों में कमी या बढ़ोतरी से महंगाई दर तय होती है।

खुदरा महंगाई दर वह दर है, जो जनता को सीधे तौर पर प्रभावित करती है। खुदरा महंगाई दर को बताने वाला सूचकांक उपभोक्ता कीमत सूचकांक होता है। यह सूचकांक उपभोक्ताओं द्वारा किसी भी वस्तु या सेवा के लिए किए जाने वाले औसत भुगतान पर आधारित होता है। 157 देश खुदरा महंगाई दर के आधार पर ही नीतियां तय करते हैं। भारत में खुदरा महंगाई दर में खाद्य और पेय पदार्थ से जुड़ी चीजों और शिक्षा, संचार, परिवहन, रीक्रिएशन, अपैरल, हाउसिंग और मेडिकल केयर जैसी सेवाओं की कीमतों में आ रहे बदलावों को शामिल किया जाता है। ग्रामीण क्षेत्रों की 448 और शहरी क्षेत्रों की 460 चीजों और सेवाओं को उपभोक्ता कीमत सूचकांक में शामिल किया जाता है। 

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