सत्र बुलाएं, कानून रद्द करें

नई दिल्ली। केंद्र के बनाए तीन कृषि कानूनों का विरोध कर रहे प्रदर्शनकारी किसानों ने केंद्र सरकार को दो टूक अंदाज में बता दिया है कि वे अपनी मांगों पर कायम हैं। किसानों ने कहा है कि सरकार संसद का विशेष सत्र बुला कर तीनों कृषि कानूनों को रद्द करे। केंद्र सरकार को चेतावनी देने के अंदाज में किसान संगठनों ने बुधवार को कहा कि सरकार तीनों कानूनों को रद्द करे या किसान पूरी दिल्ली को ब्लॉक कर देंगे। इस ऐलान के साथ ही किसान संगठन बुधवार को लगातार सातवें दिन दिल्ली की सीमा पर आंदोलन के लिए डटे रहे।

किसान संगठनों ने बुधवार को केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप भी लगाए। उन्होंने कहा कि सरकार ने देश भर के किसानों के आंदोलन को तोड़ने और इसे सिर्फ पंजाब के किसानों का आंदोलन बनाने का प्रयास किया है। मंगलवार को सरकार के साथ हुई वार्ता विफल रहने के एक दिन बाद बुधवार को किसानों ने बैठक की और शाम पांच बजे के करीब प्रेस कांफ्रेंस करके सरकार से कहा कि वह पंजाब के किसानों के अलावा पूरे देश के किसान नेताओं को बातचीत के लिए बुलाए।

किसान आंदोलन से जुड़े एक संगठन के नेता प्रोफेसर दर्शनपाल ने प्रेस कांफ्रेंस में कहा- हमने आपस में मीटिंग ख़त्म की है। केंद्र सरकार ने पहले सिर्फ़ पंजाब को बुलाया था, हमने चार नुमाइंदों की समिति का प्रपोजल ठुकराया ताकि और किसानों को भी बुलाया जाए। उन्होंने कहा- योगेंद्र यादव के नाम पर सरकार को ऐतराज था। सरकार ने दिखाने का प्रयास किया कि ये सिर्फ पंजाब के किसानों का आंदोलन है। सरकार ने हमें बांटने की कोशिश की। सरकार ने हमें टरकाने की कोशिश की।

प्रोफेसर दर्शनपाल ने बुधवार को कहा- हमने मिल कर निर्णय किया है कि कल फिर इन्हें लिख कर देंगे। हम चाहते हैं कि तीनों कानूनों को रद्द करें। हम चाहते हैं कि सरकार विशेष सत्र बुला कर इन कानूनों को रद्द कर दे। नहीं तो आंदोलन होगा। पूरी दिल्ली ब्लॉक कर देंगे। उन्होंने कहा- हमने निर्णय किया है कि हमारे पंजाब के किसानों के अलावा पूरे देश के किसान नेताओं को बातचीत के लिए बुलाया जाए। हमने पांच तारीख को पूरे देश में मोदी सरकार का पुतला दहन करने का आह्वान किया है। उन्होंने कहा- पूरे देश में पांच तारीख को धरना देंगे। सात तारीख को खिलाड़ी और कलाकार, जिन्हें राष्ट्रीय अवार्ड मिले हैं वे उन्हें वापस दे देंगे।

प्रदर्शन में शामिल भारतीय किसान यूनियन के अध्यक्ष स्वराज सिंह ने कहा- हम सड़क पर नहीं बैठे हैं। प्रशासन ने बैरिकेड्स और जवान खड़े करके हमारा रास्ता रोका है और इसलिए हम यहां रुके हैं। हमें यह जगह अस्थायी जेल जैसी लगती है और हमें रोका जाना गिरफ्तारी की तरह है। हम जैसे ही यहां से छूटे तो सीधा दिल्ली जाएंगे। इस बीच आंदोलन की सफलता के लिए भारतीय किसान यूनियन, टिकैत गुट के नेताओं ने गाजीपुर सीमा पर हवन किया। इस बीच दिल्ली पुलिस ने दिल्ली-हरियाणा के टिकरी बॉर्डर के साथ-साथ बुधवार को झरौदा और झटीकरा सीमा को पूरी तरह बंद कर दिया है।

आज फिर होगी बातचीत

केंद्र सरकार के बनाए तीन कृषि कानूनों के विरोध में पिछले सात दिन से राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली की सीमा पर आंदोलन कर रहे किसान संगठनों के साथ सरकार गुरुवार को एक बार फिर बात करेगी। मंगलवार को हुई वार्ता की विफलता के बाद केंद्र सरकार ने बुधवार को दिन भर इस मामले में अपनी रणनीति तय की। गुरुवार को होने वाली वार्ता से पहले बुधवार को कई बैठकें हुईं। केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने बुधवार को कहा कि सरकार किसानों से बातचीत करने और मामले को सुलझाने के लिए तैयार है।

इससे पहले नरेंद्र सिंह तोमर और रेल मंत्री पीयूष गोयल ने बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से उनके घर पर मुलाकात की। गौरतलब है कि तोमर और गोयल दोनों मंगलवार को किसानों के साथ हुई पहली वार्ता में शामिल थे। यह बातचीत नाकाम रही थी। दोनों मंत्रियों ने मंगलवार को किसानों से हुई बातचीत का अपडेट बुधवार को अमित शाह को दिया। मंगलवार को सरकार के साथ 35 किसान संगठनों की करीब तीन घंटे की बातचीत हुई थी, जिसमें कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर के अलावा रेल मंत्री पीयूष गोयल और वाणिज्य राज्य मंत्री सोमप्रकाश मौजूद रहे थे।

किसानों के साथ पहली मीटिंग में सरकार कानूनों पर प्रजेंटेशन दिखा कर इसके फायदे गिनवाती रही, लेकिन किसान तीनों कानूनों को वापस लेने की मांग पर अड़े रहे। सरकार ने न्यूनतम समर्थन मूल्य पर एक प्रजेंटेशन दिया था, लेकिन किसान इससे प्रभावित नहीं हुए। उन्होंने इतना तक कह दिया कि हम कुछ तो हासिल करेंगे, भले गोली हो या फिर शांतिपूर्ण हल। किसानों ने कृषि कानूनों को डेथ वारंट बताया है।

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