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किसानों की आज बड़ी कार्रवाई!

नई दिल्ली। केंद्र सरकार के बनाए तीन कृषि कानूनों के विरोध में प्रदर्शन कर रहे किसानों के आंदोलन के 16 दिन हो गए हैं। इस बीच सरकार से किसानों की पांच दौर की वार्ता हुई है, जिसमें कोई नतीजा नहीं निकला। बुधवार को सरकार ने एक लिखित प्रस्ताव भेजा, जिसे किसानों ने ठुकरा दिया। अब किसान शनिवार को बड़ी कार्रवाई की तैयारी कर रहे हैं। पहले की गई घोषणा के मुताबिक किसान शनिवार को दिल्ली-जयपुर और दिल्ली-आगरा हाईवे जाम करेंगे। किसानों की इस घोषणा से एलर्ट सरकार ने इन दोनों हाईवे पर सुरक्षा बढ़ा दी है। दोनों हाईवे पर दोनों तरफ बड़ी संख्या में जवानों को तैनात किया गया है।

इसके बाद किसानों ने 14 दिसंबर को पूरे देश में आंदोलन करने का ऐलान किया है और यह भी कहा कि वे दिल्ली का घेराव करके पूरी दिल्ली को जाम करेंगे। उससे पहले किसान सरकार के दूसरे प्रस्ताव का इंतजार कर रहे हैं। दूसरी ओर केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा है कि उनको किसानों के जवाब का इंतजार है। उन्होंने कहा है कि सरकार ने जो प्रस्ताव भेजा था, उस पर किसान संगठनों ने जवाब नहीं दिया है। सिर्फ मीडिया के जरिए मालूम हुआ है कि किसानों ने प्रस्ताव खारिज कर दिया है।

इस बीच खबर है कि दिल्ली की सीमा पर पिछले 16 दिन से डटे किसानों का साथ देने के लिए पंजाब से 50 हजार किसानों का एक जत्था रवाना हुआ है। शुक्रवार को सात सौ ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में करीब 50 हजार किसान-मजदूर अमृतसर से दिल्ली के लिए निकले हैं। काफिले का नेतृत्व कर रहे किसान-मजदूर संघर्ष कमेटी के प्रमुख सरवण सिंह पंधेर ने कहा- हम छह महीने के लिए राशन और सामान लेकर दिल्ली जा रहे हैं और हम दिल्ली को जीतने के बाद ही लौटेंगे। दोपहर बाद तक किसानों का जत्था जालंधर पहुंच चुका था। दिल्ली रवाना होने से पहले किसानों ने श्री हरमंदिर साहिब में अरदास की। इसके बाद गोल्डन गेट पर इकट्ठा हुए और वहीं से दिल्ली के लिए रवाना हुए।

किसानों के आंदोलन के आगे की रूप-रेखा बताते हुए भारतीय किसान यूनियन के प्रमुख बलबीर एस राजेवाल का कहना है कि किसानों का ट्रेनें रोकने का कोई प्रोग्राम नहीं है। गौरतलब है कि किसान नेताओं ने बीते दिनों हुई बैठक में 15 मांगें रखी थी, जिनमें से किसानों का दावा है कि सरकार 12 मांगें मानने को तैयार है। तभी किसानों का कहना है कि सरकार 15 में से 12 मांगें मानने को तैयार है इसला मतलब है कि ये तीनों कृषि कानून पूरी तरह सही नहीं हैं। इसलिए इन्हें वापस लेना चाहिए।

भारतीय किसान यूनियन सुप्रीम कोर्ट पहुंचा

पश्चिमी उत्तर प्रदेश में प्रभावी किसान संगठन भारतीय किसान यूनियन ने केंद्र सरकार के बनाए तीन कृषि कानूनों को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। शुक्रवार को किसान आंदोलन के 16वें दिन भारतीय किसान यूनियन ने इन तीनों को रद्द करने की मांग करते हुए सर्वोच्च अदालत में याचिका दायर की। इस तरह किसानों और सरकार की लड़ाई अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई है। भारतीय किसान यूनियन का कहना है कि इन कानूनों के चलते किसान कारपोरेट के लालच के आगे कमजोर होंगे।

दूसरी ओर केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा है कि किसानों को विरोध छोड़ कर बातचीत करनी चाहिए, हम इसके लिए तैयार हैं। किसानों ने बुधवार को सरकार का लिखित प्रस्ताव ठुकरा दिया था। इस बारे में कृषि मंत्री ने शुक्रवार को कहा- हमें किसानों से कोई जवाब नहीं मिला है। सिर्फ मीडिया के जरिए पता चला कि उन्होंने प्रस्ताव ठुकरा दिया। हमने अपने प्रपोजल में आपत्तियां दूर करने की कोशिश की है। हमें उनकी तरफ से आगे की बातचीत का प्रपोजल नहीं मिला है।

किसान नेता बूटा सिंह ने कहा कि कानून रद्द करने को लेकर अभी तक कोई फैसला नहीं हुआ, इसलिए जल्दी ही ट्रेनें रोकने की तारीख का ऐलान करेंगे। वहीं भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहा कि सरकार और किसान दोनों को पीछे हटना होगा। सरकार कानून वापस ले तो किसान अपने घरों को चले जाएंगे। उन्हीं के संगठन ने इन कानूनों को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है।

शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर और रेल मंत्री पीयूष गोयल की प्रेस कांफ्रेंस का वीडयो शेयर किया और लोगों से इसे देखने की अपील की। गौरतलब है कि दोनों केंद्रीय मंत्रियों ने गुरुवार को प्रेस कांफ्रेंस की थी, जिसमें विस्तार से कृषि कानूनों पर सरकार का पक्ष रखा गया था। इस बीच किसान आंदोलन के दौरान कानून-व्यवस्था संभालने के लिए सिंघु बॉर्डर पर ड्यूटी देने वाले दो आईपीएस अधिकारी कोरोना पॉजिटिव हो गए हैं। इनमें एक डीसीपी और एक एडिशनल डीसीपी हैं। इन्हें होम आइसोलेट कर दिया गया है।

भाजपा बताएगी कानून के फायदे

एक तरफ केंद्र सरकार किसानों के साथ बातचीत में तीनों कृषि कानूनों के बहुत सारे प्रावधानों को बदलने पर राजी हो रही है तो दूसरी ओर भारतीय जनता पार्टी इन कानूनों के फायदे बताने के लिए देश भर में अभियान चलाने वाली है। पार्टी ने तय किया है कि उसके नेता देश में भर में प्रेस कांफ्रेंस करेंगे और चौपाल लगाएंगे। हजारों की संख्या में चौपाल लगाने का फैसला किया गया है और सात सौ प्रेस कांफ्रेंस होगी, जिसमें इन कानूनों के फायदे के समझाए जाएंगे। इस तरह भाजपा किसान आंदोलन का जवाब देने की तैयारी कर रही है।

इस अभियान के तहत चौपालें लगाई जाएंगी, प्रेस कांफ्रेंस की जाएंगी और भाजपा के नेता किसानों से सीधे मिलेंगे। यह अभियान देश के हर जिले में शुक्रवार से शुरू हो गया। गौरतलब है कि तीन केंद्रीय कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग कर रहे किसान दिल्ली की सीमा पर 16 दिन से आंदोलन कर रहे हैं। किसान आने वाले दिनों में आंदोलन तेज करने की चेतावनी दे चुके हैं। मांगें मनवाने के लिए उन्होंने हाईवे बंद करने का ऐलान किया है।

बहरहाल, प्रधानमंत्री सहित तमाम भाजपा नेता लगातार कह रहे हैं कि कानूनों को लेकर किसानों में गलतफहमी फैलाई जा रही है। इससे निपटने के लिए पार्टी आने वाले दिनों में सात सौ प्रेस कांफ्रेंस करेगी। इसके अलावा हजारों चौपालें लगाई जाएंगी। भाजपा कार्यकर्ता और नेता किसानों से मिल कर सरकार के फैसलों का मकसद बताएंगे। भाजपा के संगठन महामंत्री बीएल संतोष ने गुरुवार को सभी राज्यों के प्रभारी और प्रदेश अध्यक्षों से इस मसले पर वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए बात की।

केंद्र सरकार का दावा है कि ये कानून किसानों को फायदा पहुंचाने के मकसद से लाए गए हैं। इसी लाइन पर भाजपा का कहना है कि कानून फायदेमंद हैं लेकिन विपक्ष ने इस मुद्दे पर किसानों को गुमराह कर दिया है। इसलिए, पार्टी किसानों को कानूनों के फायदे बताने के लिए यह अभियान शुरू कर रही है। सोशल मीडिया पर भी भाजपा ने कानून के फायदे बताना शुरू कर दिया है।

 

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