किसान चाहते हैं, पीएम बात करें - Naya India
समाचार मुख्य| नया इंडिया|

किसान चाहते हैं, पीएम बात करें

नई दिल्ली। कैंद्र सरकार के बनाए तीन कानूनों के विरोध में दिल्ली की सीमा पर पिछले 23 दिन से आंदोलन कर रहे किसान चाहते हैं कि उनकी मांगों को समझने और उसे पूरा करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सीधे उनसे बात करें। मध्य प्रदेश के किसानों को संबोधित करते हुए शुक्रवार को प्रधानमंत्री ने हाथ जोड़ कर और विनम्रता के साथ कहा कि उनकी सरकार किसानों की हर आशंका को दूर करने के लिए बातचीत करने को तैयार है। इसके बाद दिल्ली के सिंघू बॉर्डर पर बैठे किसानों ने कहा कि प्रधानमंत्री किसान संगठनों से बात करें। गौरतलब है कि सरकार के साथ किसानों की आखिरी वार्ता आठ दिसंबर को हुई थी। यानी पिछले 10 दिनों से वार्ता बंद है।

दिल्ली में पड़ रही कड़ाके की ठंड में पिछले 23 दिन से दिल्ली की सीमा पर आंदोलन कर रहे किसानों ने शुक्रवार को कहा कि ठंड को देखते हुए और टेंट का बंदोबस्त किया जा रहा है ताकि लोगों को खुले में नहीं सोना पड़े। इतनी ठंड और किसानों की मुश्किलों के बावजूद सरकार ने पिछले 10 दिन से वार्ता स्थगित कर रखी है और मीडिया के जरिए ही दोनों तरफ से संवाद हो रहा है। बहरहाल, किसानों ने कहा है कि वे तीनों कानूनों को वापस लिए जाने की अपनी मांग पर कायम हैं और इन कानूनों के खिलाफ अपनी लड़ाई नहीं छोड़ेंगे।

इस बीच चिपको आंदोलन के नेता सुंदरलाल बहुगुणा ने किसान आंदोलन को समर्थन दिया है। बहुगुणा ने वीडियो रिलीज कर कहा- मैं अन्नदाताओं की मांगों का समर्थन करता हूं। देश की खाद्य सुरक्षा देने में किसान देश के असली हीरो हैं। बहरहाल, दिल्ली की सीमा पर डटे किसानों का कहना है कि वे कृषि कानूनों के खिलाफ लंबी लड़ाई की तैयारी कर रहे हैं। ठंड को देखते हुए ज्यादा टेंट लगा रहे हैं।

उधर तीन कृषि कानूनों को रद्द कराने की मांग को लेकर किसानों का कारवां गुरुवार को मुरैना से दिल्ली के लिए रवाना हुआ। एकता परिषद के बैनर तले दिल्ली के लिए रवाना हुए किसानों में मध्य प्रदेश के साथ-साथ राजस्थान, उत्तर प्रदेश, ओड़िशा, छत्तीसगढ़ और केरल यानी छह राज्यों से आए किसान भी शामिल हैं। इस जत्थे में शामिल किसानों ने कहा कि दिल्ली का आंदोलन सिर्फ पंजाब का आंदोलन नहीं है, अब ये पूरे देश के किसानों की आवाज बन गया है।

एकता परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष पीवी राजगोपाल ने मुरैना में पुराने बस स्टैंड पर किसानों को संबोधित करते हुए मोदी सरकार पर तंज किया और कहा कि देश की अदालतों में चल रहे मुकदमों में से 60 फीसदी मामले किसानों की जमीनों के विवाद से संबंधित हैं। उन्होंने कहा- कोर्ट-कचहरी कर रहे किसानों की मेहनत के रुपए व्यर्थ जा रहे हैं। केंद्र सरकार को चाहिए कि रिटायर्ड जजों की सेवाएं लेकर किसानों के मुकदमों का निराकरण जल्द कराए। स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशें लागू करने की भी मांग की।

Leave a comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *