गैंगेस्टर विकास दुबे पुलिस ‘मुठभेड़’ में खत्म

कानपुर। उत्तर प्रदेश के कानपुर का गैंगेस्टर और आठ पुलिस वालों की हत्या का आरोपी विकास दुबे शुक्रवार की सुबह पुलिस के साथ एक कथित मुठभेड़ में मारा गया। विकास दुबे को गुरुवार को मध्य प्रदेश के उज्जैन में महाकाल मंदिर से गिरफ्तार किया गया था। उसे उत्तर प्रदेश की एसटीएफ की टीम मध्य प्रदेश से लेकर कानपुर जा रही थी। पुलिस का कहना है कि कानपुर से थोड़ा पहले पुलिस की एक गाड़ी पलट गई, जिसके बाद मची अफरातफरी में विकास दुबे ने एक इंस्पेक्टर की गन छीन ली और भागने का प्रयास किया। पुलिस का यह भी कहना है कि उसने पुलिस के ऊपर फायरिंग की, जिसके बाद पुलिस को आत्मरक्षा के लिए गोलियां चलानी पड़ी, जिसमें वह मारा गया।

पुलिस ने शुक्रवार की शाम को एक प्रेस नोट जारी करके पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी। पुलिस ने बताया कि यूपी एसटीएफ की टीम उसे उज्जैन से कानपुर ले जा रही थी, लेकिन शहर से 17 किमी पहले सचेंडी थाना क्षेत्र में सुबह साढ़े छह बजे काफिले की एक गाड़ी पलट गई। विकास उसी में बैठा था। एसटीएफ ने बताया कि मवेशियों के सामने आने से गाड़ी पलटी थी। एसटीएफ के मुताबिक इस दौरान विकास पिस्टल छीन कर भाग निकला। जब उसे पकड़ने की कोशिश की गई तो उसने फायर कर दिया।

पुलिस का कहना है कि जवाबी कार्रवाई में वह जख्मी हो गया। तीन गोलियां उसकी छाती में और एक बांह में लगी। विकास को अस्पताल ले जाया गया। जहां उसे सुबह सात बज कर 55 मिनट पर मृत घोषित कर दिया। गौरतलब है कि विकास को गुरुवार को उज्जैन के महाकाल मंदिर से गिरफ्तार किया गया था। मौत के बाद उसका कोरोना जांच के लिए सैंपल लिया गया था, जिसकी रिपोर्ट निगेटिव आई है।

एसटीएफ ने बताया कि गाड़ी पलटने से इंस्पेक्टर रमाकांत पचौरी, सब इंस्पेक्टर पंकज सिंह, अनूप सिंह और सिपाही सत्यवीर और प्रदीप को चोटें आईं और वे बेहोशी की हालत में पहुंच गए। इस दौरान विकास ने इंस्पेक्टर रमाकांत पचौरी की पिस्टल छीन ली और कच्चे रास्ते पर भागने लगा। पीछे से दूसरी गाड़ी से आ रहे एसटीएफ के डीएसपी तेजबहादुर सिंह और साथी पुलिसवालों ने उसका पीछा किया तो विकास फायर करने लगा। उसे जिंदा पकड़ने की पूरी कोशिश की गई, लेकिन वह फायर करता रहा। जवाबी फायर में विकास घायल हो गया। उसे तुरंत सरकारी अस्पताल ले जाया गया, जहां उसको मृत घोषित कर दिया गया।

मीडिया की गाड़ियां पहले ही रोकी गईं!

उत्तर प्रदेश के कानपुर में आठ पुलिस वालों की हत्या के आरोपी गैंगेस्टर विकास दुबे को उज्जैन से कानपुर ला रही यूपी पुलिस की एसटीएफ की गाड़ियों के पीछे मीडिया की गाड़ियां भी चल रही थीं पर बताया जा रहा है कि उन्हें मुठभेड़ की जगह से पांच किलोमीटर पहले ही रोक दिया गया। हालांकि पुलिस ने इसका खंडन किया है। बताया जा रहा है कि उज्जैन से लेकर कानपुर आ रहे पुलिस काफिले के साथ चल रही मीडिया की गाड़ियों को संचेडी के पास रोक दिया गया था।

सोशल मीडिया में वायरल हो रहे एक वीडियो में दिख रहा है कि दुबे के साथ हुई मुठभेड़ की जगह से पहले ही मीडिया की गाड़ियों को रोक दिया गया था। यह भी बताया जा रहा है कि मीडिया की गाड़ियों को कई जगह रोका गया। एक मीडिया समूह के पत्रकार का कहना है कि गाड़ी की चाबी ले ली गई थी। हालांकि बाद में फिर चाबी लौटा दी गई। मीडिया को रोके जाने की खबरों से इस कथित मुठभेड़ को लेकर ज्यादा संदेह जताया जाने लगा है।

एक पत्रकार ने नाम नहीं जाहिर करने की शर्त पर बताया कि संचेडी इलाके में मीडिया की गाड़ियों को रोक दिया गया, जिसके कुछ देर बाद ही भौती इलाके में दुबे के मुठभेड़ में मारे जाने की खबर आई। इस बारे में कानपुर के एसएसपी दिनेश कुमार ने कहा कि उनके पास इसकी कोई जानकारी नही कि विकास दुबे को लेकर आ रहे पुलिस के वाहन के पीछे आ रहे मीडियाकर्मियों के वाहनों को रोका गया था। उन्होंने कहा कि मीडिया के वाहनों को रोका नही गया था। हालांकि एसटीएफ के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि मीडिया की गाड़ियों को शायद जांच के लिए रोका गया हो।

 

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