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माइनस 9.5 फीसदी रहेगी जीडीपी

मुंबई। कोरोना महामारी के संकट के बीच भले अर्थव्यवस्था के पटरी पर लौटने के दावे किए जा रहे हैं पर हकीकत यह है कि अर्थव्यवस्था इस पूरे वित्त वर्ष में निगेटिव ही रहने वाली है। भारतीय रिजर्व बैंक ने चालू वित्त वर्ष में जीडीपी की विकास दर के माइनस में रहने के अंदेशे पर मुहर लगा दी है। केंद्रीय बैंक ने शुक्रवार को कहा है कि चालू वित्त वर्ष 2020-21 में सकल घरेलू उत्पाद यानी जीडीपी की दर में साढ़े नौ फीसदी की गिरावट आ सकती है।

मौद्रिक नीति समिति की तीन दिन चली समीक्षा बैठक के बाद रिजर्व बैंक ने शुक्रवार को चालू वित्त वर्ष की जीडीपी का अनुमान जारी किया। इससे पहले केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय, सीएसओ ने बताया था कि इस  वित्त वर्ष की पहली तिमाही में जीडीपी में 23.9 फीसदी की गिरावट आई है। इसका मतलब है कि अगले तीन तिमाहियों में अर्थव्यवस्था की स्थिति में सुधार होगा फिर भी पूरे वर्ष में आर्थिकी निगेटिव ही रहने वाली है।

मौद्रिक नीति समिति की बैठक बुधवार को शुरू हुई थी। इस बैठक के बाद आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था कोरोना वायरस के खिलाफ अभियान में निर्णायक चरण में प्रवेश  कर रही है। उन्होंने उम्मीद जताते हुए कहा- अप्रैल से जून की तिमाही में अर्थव्यवस्था में आई गिरावट अब पीछे रह गई है और अर्थव्यवस्था में उम्मीद की किरण दिखने लगी है। उन्होंने विनिर्माण क्षेत्र और ऊर्जा खपत में तेजी का जिक्र किया और कहा कि मुद्रास्फीति भी 2020-21 की चौथी तिमाही में कम होकर तय लक्ष्य के दायरे में आ सकती है।

गौरतलब है कि खुदरा मुद्रास्फीति हाल के महीनों में छह फीसदी से ऊपर पहुंच गई। आरबीआई मौद्रिक नीति समीक्षा में मुख्य रूप से खुदरा मुद्रास्फीति पर गौर करता है। सरकार ने आरबीआई को दो फीसदी घट-बढ़ के साथ मुद्रास्फीति को चार प्रतिशत पर रखने का लक्ष्य दिया हुआ है। बहरहाल, शक्तिकांत दास ने आर्थिक विकास दर के बारे में कहा कि जीडीपी में चालू वित्त वर्ष में 9.5 फीसदी की गिरावट आने का अनुमान है। उन्होंने यह भी कहा कि चालू वित्त वर्ष की दूसरी छमाही में अर्थव्यवस्था में तेजी आएगी और जनवरी-मार्च तिमाही में यह सकारात्मक दायरे में पहुंच सकती है।

अभी और सस्ता नहीं होगा कर्ज

भारतीय रिजर्व बैंक ने नीतिगत ब्याज दरों को स्थिर रखने का फैसला किया। खुदरा महंगाई की बढ़ती दर को देखते हुए केंद्रीय बैंक ने रक्षात्मक रहने का फैसला किया है। दो महीने पर होने वाली मौद्रिक नीति समीक्षा की तीन दिन की बैठक के बाद रिजर्व बैंक ने शुक्रवार को ऐलान किया कि नीतिगत दर यानी रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा। रिजर्व बैंक ने इसे चार फीसदी पर बरकरार रखा।

हालांकि आरबीआई ने मौद्रिक नीति के मामले में नरम रुख बनाए रखा और कहा कि जरूरत पड़ने पर आर्थिक विकास दर में तेजी लाने के लिए वह जरूरी कदम उठाएगा। रिजर्व बैंक का अनुमान है कि चालू वित्त वर्ष में अर्थव्यवस्था में 9.5 फीसदी की गिरावट आ सकती है। बहरहाल, रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने शुक्रवार को कहा- मौजूदा और उभरती व्यापक आर्थिक स्थिति के आकलन के आधार पर मौद्रिक नीति समिति की बैठक में सभी सदस्यों ने आम सहमति से नकदी समायोजन सुविधा यानी एलएएफ के तहत रेपो दर को चार फीसदी पर बरकरार रखने का फैसला किया।

इसके साथ ही रिवर्स रेपो 3.35 फीसदी और सीमांत स्थायी सुविधा यानी एमएसएफ व बैंक दर 4.25 फीसदी पर बरकरार रहेगी। रेपो दर वह ब्याज है, जिस पर बैंक रिजर्व बैंक से नकदी की फौरी जरूरतों को पूरा करने के लिए कर्ज लेते हैं, जबकि रिवर्स रेपो बैंक द्वारा आरबीआई को दिए जाने वाले कर्ज या उसके पास रखने वाली राशि पर मिलने वाला ब्याज है।

शक्तिकांत दास ने मौद्रिक नीति समीक्षा की जानकारी देते हुए यह भी कहा कि आरबीआई आर्थिक विकास को पटरी पर लाने के लिए उदार रुख को बनाए रखेगा। उदार रुख से कोविड-19 से प्रभावित अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए जरूरत पड़ने पर नीतिगत दरों में कटौती की जा सकती है। आरबीआई ने यह फैसला महंगाई दर को तय लक्ष्य के भीतर रखने के लिए ऐसा किया है।

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