पिछली तिमाही में विकास दर 4.7 फीसदी रही

नई दिल्ली। कृषि क्षेत्र में सुधार के बीच विनिर्माण क्षेत्र के निराशाजनक प्रदर्शन से चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वृद्धि दर घटकर करीब सात साल के निचले स्तर 4.7 प्रतिशत पर आ गयी जबकि दूसरी तिमाही में यह 5.1 प्रतिशत (संशोधित अनुमान) रही थी।

इसके साथ ही चालू वित्त वर्ष में जीडीपी के पाँच प्रतिशत की गति से बढ़ने का दूसरा अग्रिम अनुमान जारी किया गया है। केन्द्रीय सांख्यिकी कार्यालय द्वारा शुक्रवार को यहाँ जारी आँकड़ों के अनुसार, वर्ष 2018-19 में जीडीपी वृद्धि दर 6.1 प्रतिशत रही थी। इस अवधि में नॉमिनल जीडीपी वृद्धि दर 7.5 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया है।

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दूसरे अग्रिम अनुमान को जारी करने के दौरान जिन आँकड़ों का उपयोग किया गया है उनमें कोयला उत्पादन, कच्चा तेल उत्पादन, प्राकृतिक गैस उत्पादन, सीमेंट उत्पादन, स्टील का उपभोग, व्यावसायिक वाहनों की बिक्री, बड़े बंदरगाहों पर माल आवाजाही, हवाई अड्डों पर माल परिवहन, हवाई यात्रियों की संख्या, रेलवे से माल एवं यात्री परिवहन, बैंक में जमा और ऋण उठाव, औद्योगिक उत्पादन, थाेक महँगाई शामिल है।

इसमें कहा गया है कि चालू वित्त वर्ष में वास्तविक जीडीपी के 146.84 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान है जबकि वर्ष 2018-19 के पहले संशोधित अनुमान में जीडीपी 139.81 लाख करोड़ रुपये रहा था। इस तरह से वर्ष 2018-19 में जीडीपी वृद्धि दर 6.1 प्रतिशत रही थी जिसके चालू वित्त वर्ष में पाँच प्रतिशत रहने का अनुमान है। वर्तमान बाजार मूल्य पर चालू वित्त वर्ष में जीडीपी के पिछले वित्त वर्ष के 189.71 लाख करोड़ रुपये की तुलना में 7.5 प्रतिशत बढ़कर 203.85 लाख करोड़ रुपये पर पहुँचने का अनुमान है।

चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही में जीडीपी के 36.65 लाख करोड़ रुपये रहा है जो पिछले वित्त वर्ष की इसी अवधि के 35 लाख करोड़ रुपये की तुलना में 4.7 प्रतिशत अधिक है। इस तिमाही में कृषि, वानिकी एवं मत्स्य पालन 3.5 प्रतिशत की दर से बढ़ा है जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में यह दो प्रतिशत रहा था। विनिर्माण क्षेत्र की वृद्धि पिछले वर्ष तीसरी तिमाही में 5.2 प्रतिशत थी जो इस वर्ष घटकर 0.2 प्रतिशत पर, खान एवं खनन गतिविधियाँ 4.44 प्रतिशत की तुलना में गिरकर 3.2 प्रतिशत पर, बिजली, गैस, जलापूर्ति और अन्य यूटिलिटी सेवा क्षेत्र 9.5 प्रतिशत की तुलना में मात्र 0.7 प्रतिशत ही बढ़ा है। निर्माण गतिविधियों में सुस्ती बनी हुई है और यह 6.6 प्रतिशत की तुलना में 0.3 प्रतिशत ही बढ़ पाया है।

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