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मोदी ने बताया गुजरात-बंगाल का कनेक्शन

कोलकाता। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले विश्व भारती विश्वविद्यालय के कार्यक्रम में साड़ी के बहाने बंगाल और गुजरात का कनेक्शन बताया। उन्होंने गुरुवार को पश्चिम बंगाल की विश्व भारती यूनिवर्सिटी के शताब्दी समारोह को वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए संबोधित किया। उन्होंने कहा कि विश्व भारती के लिए गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर का विजन आत्मनिर्भर भारत का भी सार है।

मोदी ने इस मौके पर गुजरात और बंगाल का साड़ी कनेक्शन भी बताया। उन्होंने बताया कि रवींद्रनाथ टैगोर के बड़े भाई आईसीएस में रहते हुए गुजरात में भी नियुक्त हुए थे। उनकी पत्नी ज्ञाननंदिनी देवी देखा कि जब महिलाएं दाएं कंधे पर साड़ी का पल्लू रख कर काम करती हैं तो उन्होंने दिक्कत होती है। मोदी ने कहा- ठीक-ठीक तो याद नहीं पर बाएं पल्लू की साड़ी पहनने का चलन उन्होंने ही शुरू किया।

प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा- वेद से विवेकानंद तक भारत के चिंतन की धारा गुरुदेव के राष्ट्रवाद के चिंतन में भी मुखर थी और ये धारा अंतर्मुखी नहीं थी। वो भारत को विश्व के अन्य देशों से अलग रखने वाली नहीं थी। उनका विजन था कि जो भारत में सर्वश्रेष्ठ है, उससे विश्व को लाभ हो और जो दुनिया में अच्छा है, भारत उससे भी सीखे।

मोदी ने कहा- आपके विश्वविद्यालय का नाम ही देखिए- विश्व-भारती। मां भारती और विश्व के साथ समन्वय। विश्व भारती के लिए गुरुदेव का विजन आत्मनिर्भर भारत का भी सार है। आत्मनिर्भर भारत अभियान भी विश्व कल्याण के लिए भारत के कल्याण का मार्ग है। ये अभियान, भारत को सशक्त करने का अभियान है, भारत की समृद्धि से विश्व में समृद्धि लाने का अभियान है।

ममता को नही बुलाने पर विवाद

विश्व भारती विश्वविद्यालय के शताब्दी समारोह में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी नहीं शामिल हुईं। इसे लेकर सवाल उठने के बाद तृणमूल कांग्रेस ने कहा कि उनको न्योता नहीं मिला था। ममता की पार्टी ने कहा कि मुख्यमंत्री को यूनिवर्सिटी मैनेजमेंट की ओर से कार्यक्रम में बुलाया ही नहीं गया।

राज्य के विज्ञान व प्रौद्योगिकी मंत्री ब्रत्य बसु ने कहा कि ममता बनर्जी प्रदेश की मुख्यमंत्री हैं और आधिकारिक प्रोटोकॉल के तहत उन्हें कार्यक्रम में बुलाया जाना चाहिए था। उन्होंने कहा- यूनिवर्सिटी अथॉरिटी ने इस बारे में हमसे कोई बात नहीं की। क्या मुख्यमंत्री से इस तरह का बरताव किया जाना चाहिए।

दूसरी ओर, ममता बनर्जी ने सोशल मीडिया पर लिखा कि शांति निकेतन में टैगोर के विजन और फिलॉस्फी को बचा कर रखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा- विश्व भारती विश्वविद्यालय एक सौ साल का हो गया है। शिक्षा का यह मंदिर रवींद्रनाथ टैगोर का सबसे बड़ा प्रयोग था। उन्होंने कहा कि उन्होंने आज विश्व भारती में हुए दीक्षांत समारोह में नहीं बुलाया। कुछ लोग वहां आए हैं, लेकिन वे विश्व भारती को खत्म नहीं कर सकते। आज जो लोग हैं, वे अस्थायी हैं। उनके पास सिर्फ कुछ दिन हैं।

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