तेलंगाना पुलिस का तत्काल ‘न्याय’!

हैदराबाद। तेलंगाना पुलिस ने हैदराबाद में 28 नवंबर को हुई बलात्कार और हत्या की घटना के चारों आरोपियों को एक ‘मुठभेड़’ में मार गिराया। पुलिस का दावा है कि वह शुक्रवार को तड़के इन आरोपियों को लेकर घटनास्थल पर गई थी ताकि क्राइम सीन को फिर से रिक्रिएट किया जाए। उसी दौरान आरोपियों ने पुलिस वालों के हाथ से हथियार छीन लिए और भागने का प्रयास किया। इस दौरान दोनों तरफ से फायरिंग हुई, जिसमें चारों आरोपी मारे गए। पुलिस का कहना है कि इस दौरान एक असिस्टेंट सब इंस्पेक्टर और एक जवान को भी गोली लगी।

गौरतलब है कि 28 नंवबर को चार आरोपियों ने एक पशु चिकित्सक युवती को अगवा कर लिया था। आरोपियों ने युवती के साथ बलात्कार के बाद उसकी हत्या कर दी थी और फिर उसका शव जला दिया था। इस वीभत्स कांड को लेकर पूरे देश में गुस्से का माहौल था और संसद में भी चर्चा के दौरान कई पार्टियों के सांसदों ने ऐसे मामलों में तत्काल न्याय की जरूरत बताई थी। राज्य सरकार ने इस घटना की सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने का ऐलान किया था।

मुठभेड़ के बाद शुक्रवार को तेलंगाना के साइबराबाद पुलिस कमिश्नर वी सज्ज्नार ने प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि कानून ने अपना काम किया है। उन्‍होंने कहा कि वारदात की जगह पर 10 पुलिसकर्मियों के साथ क्राइम सीन के रिक्रिएशन के लिए गए थे। उन्होंने- लेडी डॉक्‍टर का मोबाइल इन लोगों ने छिपा दिया था, जिसकी तलाश करनी थी और वारदात की जगह से साइंटिफिक सबूत भी इकट्ठा करना था।

पुलिस कमिश्नर ने कहा- चार में से दो आरोपियों ने पुलिस की पिस्‍तौल छीन कर पुलिसवालों पर फायरिंग कर दी, जिसमें एक पुलिसकर्मी की सिर में गोली लग गई। उसकी हालत गंभीर बनी हुई है। पुलिस ने एनकाउंटर से पहले चेतावनी दी थी लेकिन वे लोग फायरिंग करते रहे। इसके बाद पुलिस के पास जवाबी फायरिंग के अलावा और कोई रास्ता नहीं बचा। तेलंगाना पुलिस ने बताया कि मुठभेड़ सुबह 5:45 से 6:15 के बीच हुई। मुठभेड़ एक एसआई और एक कंस्‍टेबल जख्‍मी हो गए हैं।

पुलिस कमिश्नर ने शुक्रवार को कहा- हमने पूरे घटना की साइंटिफिक तरीके से जांच की। जांच के बाद हमने चार लोगों को गिरफ्तार किया और मामले को अदालत में रखा। अदालत ने 10 दिन के लिए उन सबको जेल भेजा दिया। चार और पांच दिसंबर को हमने जेल में पूछताछ की। आज सुबह जब वारदात की जगह लेडी डॉक्‍टर की मोबाइल तलाशने पहुंचे तो दो मुजरिम आरिफ और चिंताकुटा ने पुलिस पर पत्‍थर फेंक कर मारा और पिस्‍तौल छीन कर गोली चला दी। पुलिस ने उसे सरेंडर करने को भी कहा था लेकिन वो नहीं माने। इसके बाद पुलिस ने जवाबी कार्रवाई की।

मानवाधिकार आयोग ने भेजा नोटिस

बलात्कार और हत्या के चार आरोपियों के पुलिस ‘मुठभेड़’ में मारे जाने की घटना पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग, एनएचआरसी स्वत: संज्ञान लिया है। एनएचआरसी ने अपने महानिदेशक को जांच के आदेश दिए हैं। आयोग ने कहा है कि एसएसपी की अध्यक्षता में इस मामले की फैक्ट फाइंडिग के लिए तुरंत एक टीम घटनास्थल पर भेजी जाए और जल्दी से जल्दी इस मामले पर वह अपनी रिपोर्ट दे।

मानवाधिकार आयोग की ओर से नोटिस दिए जाने के बारे में साइबराबाद के पुलिस कमिश्नर वीसी सज्जनार ने कहा- हम एनएचआरसी के सवालों का जवाब देंगे। घटना के बाद से कई पार्टियां और मानवाधिकार समूह इस मामले पर सवाल खड़े कर रहे हैं। गौरतलब है कि शुक्रवार तड़के पांच बजे के करीब चारों आरोपियों को पुलिस ने एक मुठभेड़ में मार दिया।

भाजपा,सपा, बसपा, आप का समर्थन

हैदराबाद में पशु चिकित्सक युवती के साथ बलात्कार और हत्या के चार आरोपियों को एक कथित पुलिस मुठभेड़ में मार दिए जाने की घटना का भाजपा ने समर्थन किया है। भाजपा के साथ साथ समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी और आम आदमी पार्टी ने भी इसका समर्थन किया है। भाजपा सांसद मीनाक्षी लेखी, गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रूपाणी, मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान सहित पार्टी के कई नेताओं ने तेलंगाना पुलिस का समर्थन किया है और इस बात पर खुशी जताई है कि बलात्कार और हत्या की नृशंस घटना को अंजाम देने वालों को सजा मिल गई।

आमतौर पर पुलि मुठभेड़ों का विरोध करने वाली समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने भी इसका समर्थन किया और कहा कि खुशी है कि इससे किसी को न्याय मिला है। शुक्रवार दोपहर में उन्होंने एक ट्विट में कहा- आखिर क़ानून से भागने वाले इंसाफ़ से कितनी दूर भागते। खुशी है कि इससे किसी को न्याय मिला है लेकिन असली ख़ुशी तब होगी जब ऐसी कारगर निवारक सुरक्षा व्यवस्था व प्रतिरक्षक सामाजिक वातावरण बने, जहां ऐसे जघन्य अपराध कभी भी किसी बहन-बेटी के साथ घटित ही न हों।

बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख मायावती ने कहा कि उत्तर प्रदेश पुलिस को हैदराबाद पुलिस से प्रेरणा लेनी चाहिए। मायावती ने शुक्रवार को कहा- उत्तर प्रदेश में भाजपा सरकार का शासन है मेरा यहां की पुलिस से यह कहना है कि उनको हैदराबाद पुलिस से प्रेरणा लेनी चाहिए और सख्त कदम उठाने चाहिए। उन्होंने कहा- दुख की बात यह है कि चाहे दिल्ली हो या उत्तर प्रदेश ज्यादातर जो हमारे पुलिसकर्मी हैं आरोपित लोगों को सरकारी मेहमान बना कर उनको रखे हुए हैं।

आम आदमी पार्टी की नेता और दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाति मालिवाल ने इस घटना का समर्थन किया। उन्होंने ऐसे अपराधियों को छह महीने में सजा देने की व्यवस्था करने की मांग की और तेलंगाना की घटना का समर्थन करते हुए कहा कि जो हुआ वह अच्छा ही हुआ क्योंकि अब इन लोगों को सरकारी मेहमान बना कर रखने की जरूरत नहीं होगी। पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल ने इस पर सीधे प्रतिक्रिया देने की बजाय कहा कि लोगों का न्याय प्रणाली से भरोसा उठ रहा है, जिसे बहाल करने की जरूरत है।

सिंघवी समर्थक, मेनका विरोध में

हैदराबाद में पशु चिकित्सक युवती के साथ बलात्कार और उसकी हत्या के आरोपियों के पुलिस ‘मुठभेड़’ में मारे जाने की घटना का कांग्रेस के नेता और वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने समर्थन किया है। उन्होंने कहा है कि कई बार देश और आम लोगों की भावना का ध्यान रखना जरूरी होता है। हालांकि कांग्रेस पार्टी के कई नेताओं ने इसका विरोध किया है। कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम ने इस तरह पुलिस मुठभेड़ के जरिए त्वरित न्याय करने को गलत परंपरा बताते हुए इसका विरोध किया है। कांग्रेस में सिंघवी इकलौते नेता हैं, जिन्होंने इस घटना का समर्थन किया है।

दूसरी ओर भाजपा में मेनका गांधी इकलौती नेता हैं, जिन्होंने इस घटना का विरोध किया है। मेनका गांधी ने शुक्रवार को कहा कि तेलंगाना में जो हुआ वह बहुत भयानक हुआ इस देश के लिए। उन्होंने कहा- आप लोगों को ऐसे नहीं मार सकते हैं। आप कानून को अपने हाथ में नहीं ले सकते हैं। मेनका गांधी ने कहा कि वे आरोपी थे और वैसे भी अदालत से उसे फांसी की सजा मिलती। मेनका ने कहा- इस तरह तो अदालत और कानून का कोई फायदा ही नहीं, जिसको मन हो बंदूक उठाओ जिसको मारना हो मारो। उन्होंने कहा- कानूनी प्रक्रिया में गए बिना आप उसे मार रहे हो तो फिर कोर्ट, कानून और पुलिस का क्‍या औचित्‍य रह जाएगा।

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