मर जाउंगा, माफी नहीं मागूंगा : राहुल - Naya India
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मर जाउंगा, माफी नहीं मागूंगा : राहुल

नई दिल्ली। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने अपने बयान ‘रेप इन इंडिया’ पर उठे विवाद का जवाब देते हुए कहा है कि वह मर जाएंगे लेकिन अपने इस बयान के लिए माफी नहीं मागेंगे।

गौरतलब है कि श्री गांधी ने पिछले दिनों झारखंड के गिरिडीह में चुनावी रैली को संबोधित करते हुए कहा था कि देश में पिछले कुछ महीने से हो रही बलात्कार की घटनाओं के कारण ‘मेक इन इंडिया’ अब ‘रेप इन इंडिया’ में तब्दील हो गया है।

उनके इस बयान को लेकर देशभर में तीखी प्रतिक्रिया हुई थी और भारतीय जनता पार्टी की वरिष्ठ नेता स्मृति ईरानी ने श्री गांधी पर करारा प्रहार किया था और उनसे अपने इस बयान के लिए देश से मांफी मांगने की मांग की थी।

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गांधी ने कहा कि श्रीमती ईरानी ने उनके बयान को तोड़-मरोड़ कर पेश किया जबकि उन्होंने स्त्रियों को न्याय दिलाने की बात कही थी। श्री गांधी ने आज रामलीला मैदान पर कांग्रेस की रैली को संबोधित करते हुए अपने विरोधियों पर तंज कसते हुए कहा,“ मेरा नाम राहुल सावरकर नहीं बल्कि राहुल गांधी है। मैं मर जाउंगा लेकिन माफी नहीं मांगूगा।

देश को बांटने का काम कर रहे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा उनके सहयोगी अमित शाह को भारत को तबाह करने के लिए जनता से माफी मांगनी है।”उन्होंने कहा कि श्री मोदी ने देश को सत्ता के लिए तबाह कर दिया है। देश की अर्थव्यवस्था बर्बाद कर दी है। उन्हें सिर्फ सत्ता चाहिए और इसके लिए वह हर राेज टेलीविजन पर आना चाहते हैं।

मोदी के अलावा देश का कोई नेता टीवी पर नहीं दिखता सिर्फ मोदी दिखते हैं क्योंकि वह सत्ता के लिए पैसे का खेल करते हैं। उन्हें बेरोजगार युवाओं, परेशान किसानों तथा अत्याचार सह रही महिलाओं की चिंता नहीं है।

कांग्रेस नेता ने कहा कि प्रधानमंत्री ने देश की अर्थव्यवस्था को ऐसी चोट मारी है जाे अब तक ठीक नहीं हुई। उन्होंने जनता से झूठ बोला कि काले धन के खिलाफ लड़ाई है। भ्रष्टाचार खत्म करना है। लोगों के जेब से पैसे निकाले और लाखों रुपए अनिल अम्बानी और अडानी के हवाले किया।

By हरिशंकर व्यास

भारत की हिंदी पत्रकारिता में मौलिक चिंतन, बेबाक-बेधड़क लेखन का इकलौता सशक्त नाम। मौलिक चिंतक-बेबाक लेखक-बहुप्रयोगी पत्रकार और संपादक। सन् 1977 से अब तक के पत्रकारीय सफर के सर्वाधिक अनुभवी और लगातार लिखने वाले संपादक।  ‘जनसत्ता’ में लेखन के साथ राजनीति की अंतरकथा, खुलासे वाले ‘गपशप’ कॉलम को 1983 में लिखना शुरू किया तो ‘जनसत्ता’, ‘पंजाब केसरी’, ‘द पॉयनियर’ आदि से ‘नया इंडिया’ में लगातार कोई चालीस साल से चला आ रहा कॉलम लेखन। नई सदी के पहले दशक में ईटीवी चैनल पर ‘सेंट्रल हॉल’ प्रोग्राम शुरू किया तो सप्ताह में पांच दिन के सिलसिले में कोई नौ साल चला! प्रोग्राम की लोकप्रियता-तटस्थ प्रतिष्ठा थी जो 2014 में चुनाव प्रचार के प्रारंभ में नरेंद्र मोदी का सर्वप्रथम इंटरव्यू सेंट्रल हॉल प्रोग्राम में था। आजाद भारत के 14 में से 11 प्रधानमंत्रियों की सरकारों को बारीकी-बेबाकी से कवर करते हुए हर सरकार के सच्चाई से खुलासे में हरिशंकर व्यास ने नियंताओं-सत्तावानों के इंटरव्यू, विश्लेषण और विचार लेखन के अलावा राष्ट्र, समाज, धर्म, आर्थिकी, यात्रा संस्मरण, कला, फिल्म, संगीत आदि पर जो लिखा है उनके संकलन में कई पुस्तकें जल्द प्रकाश्य। संवाद परिक्रमा फीचर एजेंसी, ‘जनसत्ता’, ‘कंप्यूटर संचार सूचना’, ‘राजनीति संवाद परिक्रमा’, ‘नया इंडिया’ समाचार पत्र-पत्रिकाओं में नींव से निर्माण में अहम भूमिका व लेखन-संपादन का चालीस साला कर्मयोग। इलेक्ट्रोनिक मीडिया में नब्बे के दशक की एटीएन, दूरदर्शन चैनलों पर ‘कारोबारनामा’, ढेरों डॉक्यूमेंटरी के बाद इंटरनेट पर हिंदी को स्थापित करने के लिए नब्बे के दशक में भारतीय भाषाओं के बहुभाषी ‘नेटजॉल.काम’ पोर्टल की परिकल्पना और लांच।

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