वैक्सीन पर आईसीएमआर की सफाई

नई दिल्ली। कोरोना वायरस की वैक्सीन के लिए समय सीमा तय करने और लैब्स को जल्दी से जल्दी काम पूरा करने का निर्देश देने की खबरों पर उठे सवालों को लेकर इंडियन कौंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च, आईसीएमआर ने सफाई दी है। आईसीएमआर ने कहा है कि भारतीय लोगों की सुरक्षा और उनका हित सबसे बड़ी प्राथमिकता है। गौरतलब है कि पिछले दिनों यह खबर आई थी कि आईसीएमआर 15 अगस्त तक कोरोना की वैक्सीन बनाना चाहती है। इस पर मेडिकल क्षेत्र के विशेषज्ञों ने गंभीर चिंता जताई थी।

आईसीएमआर के महानिदेशक बलराम भार्गव की ओर से इस सप्ताह की शुरुआत में भेजे गए एक पत्र में कहा गया था कि संस्था स्वतंत्रता दिवस पर कोरोना वायरस वैक्सीन लांच करने के बारे में सोच रही है। इस पर विपक्ष की ओर से आरोप लगाया गया है कि आईसीएमआर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार को राजनीतिक लाभ पहुंचाने के लिए ऐसा कर रही है। आईसीएमआर के महानिदेशक के पत्र में 12 अस्पतालों में डॉक्टरों को फास्ट ट्रैक क्लिनिकल ट्रायल करने के लिए कहा गया था।

इसके बाद कुछ डॉक्टरों और शोधकर्ताओं ने कहा कि वैक्सीन के लिए छह सप्ताह की समय सीमा तय करना ठीक नहीं है। इस पर सफाई देते हुए आईसीएमआर ने शनिवार को कहा- महानिदेशक ने 12 अस्पताकों को गैरजरूरी लालफीताशाही को कम करने, बिना किसी आवश्यक प्रक्रिया को दरकिनार किए और प्रतिभागियों की भर्ती में तेजी लाने के लिए लिखा था। आईसीएमआर ने कहा कि लालफीताशाही से स्वदेशी परीक्षण किटों पर सहमति में बाधा न हो साथ ही प्रक्रिया को धीमी गति का शिकार न हो इसके लिए पत्र लिखा गया था।

आईसीएमआर ने कहा- हमारी प्रक्रिया विश्व स्तर पर स्वीकृत मानदंडों के अनुसार महामारी की संभावित बीमारियों के लिए टीके के विकास को तेजी से ट्रैक करने के लिए है, जिसमें इंसान और पशु परीक्षण समानांतर रूप से जारी रह सकते हैं। यह भी कहा गया कि डाटा सुरक्षा निगरानी बोर्ड यह तय करेगा कि वैक्सीन का परीक्षण सबसे बेहतरीन तरीके से किया जाए, बोर्ड जरूरत के मुताबिक समीक्षा भी करेगा।

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