अर्थव्यवस्था में शिल्पकारों का महत्त्वपूर्ण योगदान : राजनाथ - Naya India
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अर्थव्यवस्था में शिल्पकारों का महत्त्वपूर्ण योगदान : राजनाथ

नयी दिल्ली। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि देश के शिल्पकारों और ग्रामीण उद्योग से जुड़े कारीगरों का अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान है। सिंह ने आज यहां जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में 26वें हुनर हाट का उद्घाटन करने के बाद कहा कि ग्रामीण उद्योग का सालाना टर्नओवर 80 हजार करोड़ है जिसे पांच लाख करोड़ करने का लक्ष्य रखा गया है।

उन्होंने कहा कि हुनर हाट के माध्यम से देश की जीडीपी को बढ़ाने का मंत्रालय का लक्ष्य प्रसंसनीय है। इसके जरिए राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर की ब्रांडिंग होती है जिससे शिल्पकारों और कारीगरों को उचित कीमत मिलेगी।

उन्होंने कहा कि कला प्रतिभा और क्षमता सिर्फ बड़ी बड़ी अट्टालिकाओं में ही नहीं , बल्कि गांव और गलियों में रहती है। इस मेले में जिस प्रकार के आइटम देखने को मिले हैं , उसे बनाने वाले सचमुच इसके उस्ताद हैं। ये लोग अपनी किस्मत के भी उस्ताद हैं। यहां विभिन्न स्टालों पर लगे समान गांव और मोहल्लों में बने होंगे लेकिन जितना प्रोत्साहन और सम्मान कारीगरों और शिल्पकारों को मिलना चाहिए वह नहीं मिला परंतु हमारी सरकार ने इनको पूरा सम्मान और प्रोत्साहन दिया है।

रक्षा मंत्री ने कहा कि हुनर हाट एक साझा मंच देता है और देश की सांस्कृतिक और समृद्ध विरासत को दिखाता है। यहां कलाओं की अद्भुत प्रदर्शनी है। उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को पूरा करने के लिए हुनर हाट बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। कोरोना जैसी वैश्विक महामारी में शिल्पकारों ने आपदा को अवसर में बदल दिया। उन्हें मालूम था कि हुनर हाट लगेगा इसलिए लॉकडाउन में अपनी चीजें तैयार करते रहे। अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय के तत्वाधान में स्वदेशी दस्तकारों, शिल्पकारों के 26वें ‘हुनर हाट’ का आयोजन ‘वोकल फॉर लोकल’ थीम के साथ 20 फरवरी से 01 मार्च 2021 तक किया जा रहा है।

 

By हरिशंकर व्यास

भारत की हिंदी पत्रकारिता में मौलिक चिंतन, बेबाक-बेधड़क लेखन का इकलौता सशक्त नाम। मौलिक चिंतक-बेबाक लेखक-बहुप्रयोगी पत्रकार और संपादक। सन् 1977 से अब तक के पत्रकारीय सफर के सर्वाधिक अनुभवी और लगातार लिखने वाले संपादक।  ‘जनसत्ता’ में लेखन के साथ राजनीति की अंतरकथा, खुलासे वाले ‘गपशप’ कॉलम को 1983 में लिखना शुरू किया तो ‘जनसत्ता’, ‘पंजाब केसरी’, ‘द पॉयनियर’ आदि से ‘नया इंडिया’ में लगातार कोई चालीस साल से चला आ रहा कॉलम लेखन। नई सदी के पहले दशक में ईटीवी चैनल पर ‘सेंट्रल हॉल’ प्रोग्राम शुरू किया तो सप्ताह में पांच दिन के सिलसिले में कोई नौ साल चला! प्रोग्राम की लोकप्रियता-तटस्थ प्रतिष्ठा थी जो 2014 में चुनाव प्रचार के प्रारंभ में नरेंद्र मोदी का सर्वप्रथम इंटरव्यू सेंट्रल हॉल प्रोग्राम में था। आजाद भारत के 14 में से 11 प्रधानमंत्रियों की सरकारों को बारीकी-बेबाकी से कवर करते हुए हर सरकार के सच्चाई से खुलासे में हरिशंकर व्यास ने नियंताओं-सत्तावानों के इंटरव्यू, विश्लेषण और विचार लेखन के अलावा राष्ट्र, समाज, धर्म, आर्थिकी, यात्रा संस्मरण, कला, फिल्म, संगीत आदि पर जो लिखा है उनके संकलन में कई पुस्तकें जल्द प्रकाश्य। संवाद परिक्रमा फीचर एजेंसी, ‘जनसत्ता’, ‘कंप्यूटर संचार सूचना’, ‘राजनीति संवाद परिक्रमा’, ‘नया इंडिया’ समाचार पत्र-पत्रिकाओं में नींव से निर्माण में अहम भूमिका व लेखन-संपादन का चालीस साला कर्मयोग। इलेक्ट्रोनिक मीडिया में नब्बे के दशक की एटीएन, दूरदर्शन चैनलों पर ‘कारोबारनामा’, ढेरों डॉक्यूमेंटरी के बाद इंटरनेट पर हिंदी को स्थापित करने के लिए नब्बे के दशक में भारतीय भाषाओं के बहुभाषी ‘नेटजॉल.काम’ पोर्टल की परिकल्पना और लांच।

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