लोकसभा में शून्यकाल में गूंजा कोरोना का मसला

नई दिल्ली। लोकसभा में आज शून्यकाल में देश में कोरोना वायरस ‘कोविड-19’ के संक्रमण का मामला जोरशोर से उठाया गया और सत्ता और विपक्ष के बीच इस पर जोरदार नोंक-झोंक हो गई।

लोकसभा में कांग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी ने कोरोना महामारी का मसला उठाते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के गुरुवार रात के राष्ट्र के नाम संबोधन का जिक्र करते हुए कहा कि कोरोना से पूरा देश ही नहीं बल्कि पूरा विश्व जूझ रहा है और कांग्रेस इस समय उनके साथ हैं लेकिन मोदी के राष्ट्र के नाम संबाेधन के बाद बड़े-बड़े शहरों में आवश्यक सामग्री अचानक बाजार से गायब हो गई और वस्तुएं महंगी हो गयीं।

उन्होंने कहा कि बाजार में खाने-पीने की चीजों की जमाखाेरी बढ़ गई है जिस पर तत्काल कदम उठाए जाने की आवश्यकता है। चौधरी ने कहा कि कांग्रेस इस मामले में केन्द्र सरकार को कुछ सुझाव देना चाहती है कि इस बीमारी का आर्थिक असर सबसे अधिक दिहाड़ी श्रमिकों और गार्डों को झेलना होगा क्योंकि उन्हें कोई काम नहीं मिलेगा ।

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इसे देखते उन्हें सरकार को इन वर्गों के लिए कोई पैकेज घोषित करना चाहिए और मध्यम कारोबारियों के लिए भी कोई योजना बनाई जानी चाहिए तथा जिन लोगों ने बैंकों से कर्ज ले रखे हैं, स्थिति सामान्य होने तक उनके चुकाए जाने की सीमा बढ़ाई जानी चाहिए। इस मामले में हस्तक्षेप करते हुए संसदीय कार्य मंत्री प्रल्हाद जोशी ने कहा कि केन्द्र सरकार ने वही कदम उठाए हैं जो इस समय देश के लिए जरूरी हैं और हम सबको मिलकर इस महामारी से लड़ना है तथा सबको मिलकर साथ चलना है।

इस तरह की बातें गलत हैं कि बाजार में आवश्यक वस्तुओं की कमी हो गई है और ऐसा कहकर वह लोगों में दहशत नहीं फैलाएं। जोशी ने कहा कि हम सभी को मिलकर इस समस्या से निपटना है और जो भी कदम उठाए गए हैं वे देश की भलाई के लिए ही हैं तथा बाजार से चीजों के गायब होने की रिपोर्टें गलत हैं। तृणमूल कांगेस के प्रोफेसर सौगत राय ने कहा कि काेराेना महामारी से देश की अर्थव्यवस्था पर काफी असर पड़ रहा है और सरकार को शेयर बाजार में कारोबार को बंद करा देना चाहिए क्योंकि कोरोना के चलते बाजार में ‘आग’ लग गई है।

राय ने कहा कि प्रधानमंत्री ने कल के अपने संबोधन में कोरोना वायरस से निपटने के लिए कोई फंड घोषित नहीं किया जबकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंंप ने अपने यहां एक ऐसे कोष की स्थापना कर दी है। देश में बैंक और वित्तीय संस्थान डूब रहे हैं और सरकार काे उन पर ध्यान देने की जरूरत है।

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