भारत ने पाकिस्तान को चेताया

नई दिल्ली। भारत ने पाकिस्तान को कड़े शब्दों में चेतावनी दी है और कहा है वह भारतीय नागरिकों को आतंकवादी बताना बंद करे। गलती से सीमा पार पहुंचे दो भारतीय नागरिकों को पाकिस्तान की तरफ से आतंकवादियों की तरह पेश करने पर, विदेश मंत्रालय ने गुरुवार को कड़ी आपत्ति जताई।

गुरुवार को विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने कहा- पाकिस्तान इसे प्रोपेगेंडा के तौर पर इस्तेमाल न करे। हमारे नागरिक गलती से सीमा पार चले गए थे, उसकी जानकारी भी हमने ही पाकिस्तान को दी थी। ऐसे में भारतीय नागरिकों को हिरासत में लेने के बाद अंतरराष्ट्रीय मंच पर पाकिस्तान का दुष्प्रचार सहन नहीं किया जा सकता।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा- हमने पाकिस्तान सरकार से प्रशांत और बारीलाल नाम के भारतीय नागरिकों की तुरंत काउंसलर से मुलाकात की सुविधा उपलब्ध कराने को कहा है। हमें उम्मीद है कि पाकिस्तान हमारी मांग पर ध्यान देगा। रवीश कुमार ने कहा- 2017 में दो भारतीय गलती से पाकिस्तान चले गए थे। मई 2019 में हमने पाकिस्तान को पहला नोट लिखा था। हमने उन्हें राजनयिक मदद और सुरक्षा देने मांग की है।

गौरतलब है कि पाकिस्तान के अधिकारियों ने 18 अक्टूबर को दो भारतीयों को गिरफ्तार किया था। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इन भारतीयों पर अवैध तरीके से पाकिस्तान में प्रवेश करने का आरोप है। गिरफ्तार किए गए भारतीय नागरिक प्रशांत मध्य प्रदेश का और बारीलाल तेलंगाना का रहने है। जियो न्यूज के मुताबिक, दोनों भारतीय नागरिकों को पंजाब प्रांत के बहावलपुर में गिरफ्तार किया गया। इनके पास कोई भी दस्तावेज नहीं थे। पुलिस ने बताया कि दोनों के खिलाफ केस दर्ज कर लिया गया है। गिरफ्तार किया गया एक भारतीय, सॉफ्टवेयर इंजीनियर बताया जा रहा है। वहां की पुलिस का दावा कि उसे पाकिस्तान में आतंकी हमले को अंजाम देने के लिए भेजा गया था।

श्रीलंका भारत का करीबी दोस्त है

भारत ने श्रीलंका को अपना करीबी दोस्त बताया है। श्रीलंका में नई सरकार के गठन पर विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने कहा- श्रीलंका हमारा करीबी मित्र देश है। बोतवाया राजपक्षे वहां के नए राष्ट्रपति बने हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने उन्हें सबसे पहले बधाई दी थी। रवीश कुमार ने कहा- तमिल मुद्दे को लेकर बताना चाहता हूं कि नए राष्ट्रपति को 29-30 नवंबर को भारत का दौरा कर रहे हैं। हम दोपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाने पर जोर दे रहे हैं। इन्हें तमिल समुदाय की उम्मीदों तक लेकर जाना चाहते हैं। उन्होंने कहा- राष्ट्रपति कह चुके हैं कि वे श्रीलंका के हर समुदाय के प्रतिनिधि हैं। हमें उम्मीद है कि नए राष्ट्रपति तमिलों के न्याय, सम्मान और शांति के लिए काम करेंगे।

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