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Sunday, April 11, 2021
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चीन ने माना, उसके भी सैनिक मरे!

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बीजिंग। चीन ने आखिरकार स्वीकार किया कि पिछले साल 15 जून की रात को भारतीय सैनिकों के साथ गलवान घाटी में हुई झड़प में उसके भी सैन्य अधिकारी और जवान मारे गए थे। घटना के आठ महीने बाद चीन ने पहली बार अपने सैनिकों के मारे जाने की बात कबूली है। बताया जा रहा है कि अलग अलग स्रोत से चीनी सैनिकों के मारे जाने की खबरें आ रही थीं और उनकी संख्या भी अलग अलग बताई जा रही थी इसलिए चीन ने आधिकारिक रूप से इसकी जानकारी दी है। हालांकि उसने सिर्फ पांच सैनिकों के मारे जाने की बात कबूली है। उसने दोनों देशों के सैनिकों के बीच झड़प का एक वीडियो भी जारी किया है।

चीनी सेना के आधिकारिक अखबार पीएलए डेली ने कहा है- इस झड़प में पांच सैनिकों की मौत हुई थी। इनमें एक रेजिमेंटल कमांडर भी शामिल था। सेना ने उन्हें हीरो का दर्जा दिया है। गौरतलब है कि पिछले साल 15-16 जून की रात के पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा, एलएसी पर दोनों देशों के सैनिकों में हिंसक टकराव हुआ था। इसमें भारत के कर्नल संतोष बाबू समेत 20 जवान शहीद हुए थे। अब तक मीडिया की खबरों में चीन के 40 से ज्यादा सैनिकों के मारे जाने के दावे किए जा रहे थे।

चीन की सरकारी मीडिया ने बताया कि सेंट्रल मिलिट्री कमीशन ने शुक्रवार को माना कि काराकोरम माउंटेन पर तैनात पांच फ्रंटियर सैन्य अधिकारी और जवानों की भारत के साथ टकराव में मौत हुई थी। देश की संप्रभुता की रक्षा में योगदान के लिए उनकी तारीफ भी की गई है। चीनी सेना के पीएलए डेली के मुताबिक- सेंट्रल मिलिट्री कमीशन ने इन सैनिकों को हीरो का दर्जा दिया है। इनमें शिनजियांग मिलिट्री कमांड के रेजिमेंटल कमांडर क्यूई फेबाओ को हीरो रेजिमेंटल कमांडर फॉर डिफेंडिंग द बॉर्डर का खिताब दिया गया है।

पांचों सैनिकों को अवॉर्ड देने के दौरान गलवान में हुए घटनाक्रम के बारे में भी बताया गया। चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी, पीएलए ने बताया कि कैसे एलएसी पर भारतीय सेना ने बड़ी संख्या में सैनिकों को तैनात किया था। उसने अपना पक्ष रखते हुए दावा किया कि भारतीय सैनिक चीनी सैनिकों को पीछे हटाने की कोशिश कर रहे थे। इस दौरान चीनी सैनिकों ने स्टील ट्यूब, लाठियों और पत्थरों के हमलों के बीच देश की संप्रभुता का बचाव किया। दोनों देशों के बीच 45 साल में यह सबसे बड़ी झड़प थी।

सैनिकों की वापसी का काम पूरा

भारत और चीन के बीच नौवें दौर की वार्ता में बनी सहमति के मुताबिक दोनों देशों के सैनिकों के पीछे हटने का पहले चरण का काम पूरा हो गया है। चीन के सैनिक पैंगोंग झील के उत्तरी और दक्षिण दोनों सिरों से पीछे हट गए हैं। चीन ने अपने टैंक और दूसरी गाड़ियां व हथियार भी वहां से हटा लिए हैं। इसके बाद अब दोनों देशों के सैन्य कमांडरों के बीच शनिवार को दसवें दौर की वार्ता होगी। इसमें दूसरी जगहों से सैनिकों के पीछे हटने की प्रक्रिया तय किए जाने की संभावना है।

सैन्य कमांडरों की दसवें दौर की वार्ता मोल्डो में एलएसी के दूसरी तरफ चीन की सीमा में शनिवार को सुबह 10 बजे शुरू होगी। बताया जा रहा है कि इस वार्ता में पूर्वी लद्दाख के हॉट स्प्रिंग, गोगरा और देपसांग से सैनिकों की वापसी के बारे में बात होगी। पैंगोंग झील के इलाके से पीछे हटने के बाद सैन्य अधिकारियों के बीच यह पहली वार्ता होगी। गौरतलब है कि दोनों देशों के बीच पिछले साल अप्रैल से ही पूर्वी लद्दाख में तनाव चल रहा है।

सेना के जानकार सूत्रों ने बताया है कि पैंगोंग झील के उत्तरी और दक्षिणी सिरे पर सैनिकों के पीछे हटने, बंकर और दूसरे अस्थायी निर्माण को तोड़ने और हथियार हटाने का काम गुरुवार को पूरा हो गया। यह भी बताया गया कि दोनों पक्षों ने एक-दूसरे के इलाके में जाकर इसका मुआयना भी किया बताया गया है कि दोनों पक्षों ने पैंगोंग झील से पीछे हटने की सहमति और प्रक्रिया की विस्तार से समीक्षा की, जिसके बाद अगले दौर की वार्ता की सहमति बनी।

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