भारत- चीन के वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों की बैठक कल

नई दिल्ली। पूर्वी लद्दाख सेक्टर में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर पिछले एक महीने से जारी गतिरोध को दूर करने के लिए भारत और चीन के वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों के बीच कल पहली उच्च स्तरीय बैठक होगी।

वास्तविक नियंत्रण रेखा पर मुख्य रूप से तीन जगहों पर दोनों सेनाओं के बीच गतिरोध है और करीब पिछले एक महीने से दोनों ने वहां अच्छी खासी संख्या में सैनिकों का जमावड़ा कर रखा है।

लेफ्टिनेंट जनरल स्तर के अधिकारियों की यह बैठक चीन के चुशूल मोल्डो स्थित बार्डर पर्सनल मीटिंग प्वाइंट पर होगी जो इस तरह की बैठकों के लिए लद्दाख में निर्धारित दो केन्द्रों में से एक है। बैठक में भारत का प्रतिनिधित्व लेह स्थित 14 वीं कोर के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल हरिन्दर सिंह करेंगे जबकि चीन की और से उनके समकक्ष सैन्य अधिकारी बातचीत की मेज पर होंगे।

मंगलवार को सेना की 3 डिवीजन के प्रमुख जो मेजर जनरल रैंक के अधिकारी हैं उन्होंने अपने चीनी समकक्ष के साथ इस मुद्दे पर बात की थी लेकिन यह बातचीत बेनतीजा थी। इसके बाद आज उच्च स्तरीय बैठक का निर्णय लिया गया। इसके अलावा भी दोनों पक्षों के बीच विभिन्न स्तर के अधिकारियों की करीब 8 बैठकें हो चुकी हैं।

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दोनों देशों का मानना है कि इस तरह के मुद्दों को सुलझाने के लिए उनके बीच एक व्यवस्था है और इससे पहले भी इसी के तहत मुद्दों को सुलझाया भी गया है। लेकिन वर्ष 2017 में डोकलाम गतिरोध के बाद एक बार फिर से दोनों सेनाओं के बीच गतिरोध लंबा खिंचता दिख रहा है । उस समय भी दोनों सेनाएं लगभग 75 दिन तक आमने सामने रही थी।

सूत्रों के अनुसार बातचीत मुख्य रूप से कुछ प्रस्तावों पर होगी हालाकि अभी इन प्रस्तावों के बारे में स्पष्ट रूप से कुछ नहीं कहा गया है लेकिन यह माना जा रहा है कि भारत की सबसे प्रमुख मांग वास्तविक नियंत्रण रेखा पर एक मई की यथा स्थिति कायम करने की होगी। इसके अलावा दोनों ओर के सैनिकों को पीछे हटाने और क्षेत्र में शांति तथा स्थिरता कायम करने के उपायों पर भी चर्चा होगी। दोनों के बीच मुख्य रूप से गतिरोध पेगांग झील , गलवान घाटी और डेमचोक क्षेत्रों में है।

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