भारत-चीन के सैन्य कमांडरों ने वार्ता की

नई दिल्ली। लद्दाख के कई सेक्टर में पहले बनी सहमति के तहत चीनी सैनिकों के पीछे नहीं हटने और भारत-नेपाल सीमा के पास चीनी सैनिकों की तैनाती की खबरों के बीच भारत और चीन के सैन्य कमांडरों के बीच एक बार फिर वार्ता हुई है। रविवार को सुबह 11 बजे से यह वार्ता शुरू हुई। इस बार सैन्य कमांडरों की बैठक वास्तविक नियंत्रण रेखा, एलएसी की दूसरी तरफ चीन के हिस्से वाले मोल्डो में हुई है।

बताया जा रहा है कि रविवार की बातचीत में दोनों पक्षों ने पूर्वी लद्दाख में पेगोंग झील जैसे टकराव वाली जगहों से पीछे हटने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के तौर तरीकों को अंतिम रूप देने के लिए वार्ता की। इससे पहले चार बार सैन्य कमांडरों की वार्ता हो चुकी है। पांचवे दौर की वार्ता

में मुख्य ध्यान टकराव वाली जगहों से सैनिकों के पूरी तरह पीछे हटने और दोनों सेनाओं के पीछे के अड्डों से सैनिक व हथियारों को हटाने के लिए एक रूपरेखा तैयार करने पर रहा। गौरतलब है कि सैनिकों के पीछे हटने की औपचारिक प्रक्रिया छह जुलाई को शुरू हुई थी।

इसके बाद कई दौर की वार्ता के बाद विवाद की सभी जगहों से दोनों देशों के सैनिकों के पीछे हटने पर सहमति बनी थी। पिछले हफ्ते चीन ने कहा कि उसके पीछे हटने की प्रक्रिया पूरी हो गई हैं। हालांकि भारत ने इसे खारिज किया। इस बीच यह भी खबर है कि पैंगोंग झील के पास के इलाके पर चीन ने अपना दावा किया है और उसके सैनिक आसपास के इलाकों में मौजूद है।

चीन की सेना गलवान घाटी और टकराव वाली कुछ औक जगहों से पहले ही पीछे हट चुकी है लेकिन भारत की मांग के अनुसार पैंगोंग में फिंगर इलाकों से सैनिकों को वापस बुलाने की प्रक्रिया अभी शुरू नहीं हुई है। भारत इस बात पर जोर देता रहा है कि चीन को फिंगर फोर और फिंगर एट के बीच वाले इलाकों से अपने सैनिकों को वापस बुलाना चाहिए। दोनों पक्षों के बीच 24 जुलाई को, सीमा मुद्दे पर एक और चरण की कूटनीतिक वार्ता हुई थी। इस बीच यह भी खबर है कि नेपाल की सीमा पर लिपुलेख के पास चीन ने अपने सैनिकों की तैनाती की है। गौरतलब है कि यह इलाका भारत का है, जिसे हाल ही में चीन ने अपने नक्शे में शामिल किया है।

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