बीस साल में पहली बार घटेगी आय कर वसूली!

नई दिल्ली। नोटबंदी के बाद से ही केंद्र सरकार इस बात के लिए अपनी पीठ थपथपा रही है कि इससे आय कर देने वालों की संख्या बढ़ी है पर अब खबर आ रही है कि इस साल दो दशक में पहली बार ऐसा हो सकता है कि आय कर की वसूली कम हो जाए। आय कर विभाग के जानकार सूत्रों के मुताबिक आय कर वसूली का लक्ष्य पूरा करना तो दूर की बात है इस बार पहली बार ऐसा होगा कि वसूली कम हो सकती है।

बताया जा रहा है कि भारत के कॉरपोरेट और आय कर संग्रह में 20 साल में पहली बार गिरावट हो सकती है। केंद्र की नरेंद्र मोदी की सरकार ने चालू वित्त वर्ष में यानी 31 मार्च को खत्म हो रहे वित्तीय वर्ष में साढ़े 13 लाख करोड़ रुपए के कर संग्रह का लक्ष्य लेकर चल रही है। यह पिछले साल के लक्ष्य से 17 फीसदी ज्यादा है। लेकिन, 23 जनवरी तक आय कर विभाग सिर्फ केवल 7.3 लाख करोड़ रुपए का संग्रह ही कर पाया है। यह पिछले साल इसी अवधि में की गई कर वसूली से साढ़े पांच फीसदी कम है।

आय कर संग्रह के इन आंकड़ों की जानकारी न्यूज एजेंसी रॉयटर्स को आधा दर्जन से ज्यादा वरिष्ठ आय कर अधिकारियों ने दी है। न्यूज एजेंसी के मुताबिक, मांग में आई कमी का असर व्यापार पर पड़ा। इसके चलते कंपनियों को निवेश और रोजगार में कटौती करनी पड़ी। कर संग्रह पर असर पड़ा और इसके चलते सरकार ने इस साल पांच फिसदी विकास दर का अनुमान लगाया। यह 11 साल में सबसे कम है।

रिपोर्ट के मुताबिक, पहली तीन तिमाही में कंपनियों से एडवांस टैक्स इकट्ठा करने के बाद अधिकारी अंतिम तीन महीनों में 30-35 फीसदी की बढ़त मान कर चलते हैं। पिछले तीन सालों का आंकड़ा यहीं दिखाता भी है। मगर आठ वरिष्ठ कर अधिकारियों का मानना है कि कई कोशिशों के बावजूद वित्तीय वर्ष में कर संग्रह साढ़े 11 लाख करोड़ रुपए से कम ही रहेगा, जो कि 2018-19 के वित्तीय वर्ष में इकट्ठा किया गया था। एक अधिकारी ने कहा- लक्ष्य तो भूल जाइए। यह पहली बार होगा जब हमे प्रत्यक्ष कर यानी आय कर वसूली में कमी देखने को मिलेगी। वित्त वर्ष 2019 के मुकाबले इस बार कर संग्रह में दस फीसदी की कमी देखने को मिलेगी।

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