पाक और चीन पर राजनाथ का निशाना

नई दिल्ली। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने पाकिस्तान के साथ साथ चीन पर भी निशाना साधा है। उन्होंने कहा है कि जैसे पाकिस्तान सीमा पर भारत के साथ तनाव बनाए रखता है वैसे ही चीन भी तनाव बनाए रखना चाह रहा है। रक्षा मंत्री ने सोमवार को वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए 44 पुलों का उद्घाटन किया। पहली बार एक साथ इतने पुल देश के नाम किए गए हैं। इस मौके पर राजनाथ सिंह ने कहा कि पाकिस्तान के बाद अब चीन भी सीमा विवाद जारी रखने पर आमादा है। दोनों देश यह सब मिशन के तहत कर रहे हैं। राजनाथ ने अरुणाचल प्रदेश में एक सुरंग का शिलान्यास भी किया।

इस मौके पर रक्षा मंत्री ने कहा- सभी जानते हैं कि हमारी उत्तरी और पूर्वी सीमाओं पर क्या हो रहा है। सात हजार किलोमीटर लंबी सीमाओं पर पाकिस्तान और चीन लगातार तनाव बनाए हुए हैं। चीन-पाक की तरफ से तनाव के बावजूद भारत हर क्षेत्र में ऐतिहासिक बदलाव लाया है। बहरहाल, रक्षा मंत्री ने जिन 44 पुलों का उद्घाटन किया उन्हें सीमा सड़क संगठन, बीआरओ ने तैयार किए हैं।

राजनाथ सिंह ने इस मौके पर बताया कि 2008-16 के बीच बीआरओ का बजट 33 सौ से 46 सौ करोड़ रुपए के बीच रहता था। 2020-21 में यह बढ़ कर 11 हजार करोड़ रुपए हो गया है। बीआरओ के बनाए ये पुल लद्दाख, अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब और जम्मू-कश्मीर में हैं। इनकी मदद से सेना की हथियारबंद टुकड़ियां जल्द सीमा पर अग्रिम मोर्चे तक पहुंच सकती हैं। चीन के साथ विवाद को देखते हुए भारत सीमावर्ती इलाकों में कई दूसरे अहम प्रोजेक्ट्स पर भी काम कर रहा है।

भारत-चीन में सातवां वार्ता दौर

भारत और चीन के बीच सैन्य स्तर की सातवें दौर की वार्ता सोमवार को हुई। भारतीय सीमा में स्थित चुशुल में दोनों देशों के वरिष्ठ सैन्य व कूटनीतिक अधिकारियों ने बैठक की। इस बैठक में लद्दाख में तनाव कम करने के उपायों पर चर्चा हुई। बताया जा रहा है कि दोनों देशों के अधिकारियों ने पूर्वी लद्दाख में टकराव वाली हर जगह से सेना हटाने के बारे में बातचीत की। भारत की तरफ से वार्ता की अगुवाई लेह की 14 कॉर्प्स के लेफ्टिनेंट जनरल हरिंदर सिंह ने की। उनके साथ लेफ्टिनेंट जनरल पीजीके मेनन और विदेश मंत्रालय में दक्षिण एशियाई मामलों के संयुक्त सचिव नवीन श्रीवास्तव भी मौजूद थे।

इससे पहले शुक्रवार को चाइना स्टडी ग्रुप, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, विदेश मंत्री एस जयशंकर, एनएसए अजित डोवाल, सीडीएस जनरल बिपिन रावत और तीनों सेनाओं के प्रमुखों ने सातवें दौर की बातचीत की रणनीति को अंतिम रूप दिया था। अधिकारियों के मुताबिक, दोनों पक्षों के बीच सीमा पर शांति कायम रखने और तनाव बढ़ने से रोकने को लेकर अगले कदमों पर भी चर्चा हुई। गौरतलब है कि अगले चार महीनों में ठंड के चलते लद्दाख इलाके में स्थितियां काफी विपरीत होंगी, लिहाजा इस दौरान कोई भड़काऊ कार्रवाई न हो, इस पर सहमति बनाने का प्रयास हो रहा है। इससे पहले छठे राउंड की बातचीत 21 सितंबर को हुई थी।

छठे दौर की वार्ता में दोनों पक्षों में इस बात को लेकर सहमति बनी थी कि अग्रिम सीमा पर और ज्यादा सेना नहीं भेजी जाएगी, कोई भी पक्ष एकतरफा बदलाव नहीं करेगा और न ही कोई एक्शन लेगा, ताकि मामले को उलझने से रोका जा सके। अधिकारियों के मुताबिक, अगर चीन पैंगोंग झील के दक्षिणी किनारे स्थित चोटियों पर से भारतीय सेना हटाने की मांग करता है तो इसका सख्ती से विरोध किया जाएगा। पिछली बार भी चीन के सैन्य अधिकारियों ने कई रणनीतिक चोटियों मुखपारी, रेजांग ला और मगर हिल्स समेत कई चोटियों से भारतीय सैनिक हटाने की मांग की थी।

 

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