भ्रष्टाचार सूचकांक में भारत जस का तस

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भले पिछले साढ़े पांच साल से दावा कर रहे हैं कि वे न खाएंगे न खाने देंगे पर हकीकत यह है कि भ्रष्टाचार के अंतरराष्ट्रीय सूचकांक में भारत की स्थिति में सुधार नहीं हो रहा है। ग्लोबल करप्शन परसेप्शन इंडेक्स यानी वैश्विक भ्रष्टाचार धारणा सूचकांक 2019 में भारत की रैंकिंग में कोई सुधार नहीं हुआ है। वह 2018 की तरह ही 78वें पायदान पर बना हुआ है।

निष्पक्ष रूप से दुनिया भर के स्तर पर भ्रष्टाचार का आकलन करने वाली संस्था ट्रांसपैरेंसी इंटरनेशन की ओर से जारी हालिया सर्वे के मुताबिक, भारत का इंडेक्स में कुल स्कोर 41 रहा और वह 78वें स्थान पर है। 2017 के इंडेक्स में वह 40 अंक के साथ 81वें स्थान पर था। इससे पहले 2016 में भारत इस इंडेक्स में 79वें स्थान पर था।इस बार दिलचस्प बात यह रही कि भारत के साथ-साथ चीन, घाना, बेनिन और मोरक्को भी 78वीं रैंक पर हैं।पड़ोसी देश पाकिस्तान की रैंकिंग 120 रही।

इस इंडेक्स में सार्वजनिक क्षेत्र के भ्रष्टाचार के मामलों में 180 देशों को रखा गया था। इंडेक्स शून्य से एक सौ के पैमाने का उपयोग करता है, जहां शून्य सबसे अधिक भ्रष्ट को दिखाता है वहीं, नंबर 100 बहुत भ्रष्टाचारमुक्त को बताता है।ग्लोबल करप्शन परसेप्शन इंडेक्स के मुताबिक दो-तिहाई देशों का स्कोर 50 से कम है और औसत स्कोर 43 है। 2012 से लेकर अब तक केवल 22 देशों ने अपने स्कोर में सुधार किया है। इसमें एस्टोनिया, ग्रीस और गुयाना शामिल है। 21 देशों के स्कोर में गिरावट दर्ज की गई जिसमें ऑस्ट्रेलिया, कनाडा और निकारागुआ शामिल है। जी-7 देशों के चार देशों के स्कोर में कमी दर्ज की गई। इसमें कनाडा, फ्रांस, ब्रिटेन और अमेरिका शामिल है। जर्मनी और जापान के देशों के स्कोर में कोई सुधार नहीं हुआ।

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