सबूत जुटा रही दिल्ली पुलिस!

नई दिल्ली। जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी, जेएनयू कैंपस में नकाबपोश गुंडों के घुस कर मारपीट करने और आतंक के मामले में तीन दिन गुजर जाने के बाद भी दिल्ली पुलिस सबूत तलाश रही है और गुंडों की पहचान करने में लगी है। हालांकि सोशल मीडिया की पोस्ट और व्हाट्सएप ग्रुप के चैट वगैरह के आधार पर कई लोगों की पहचान जाहिर हो चुकी है, जो इस हमले में शामिल हो सकते हैं। पर पुलिस ने अभी तक किसी को पकड़ा नहीं है।

छात्रों और शिक्षकों पर हुए हमले में शामिल गुंडों की पहचान के लिए पुलिस वीडियो फुटेज और चेहरे पहचानने की प्रणाली का इस्तेमाल कर रही है। इस बीच हिंदू रक्षा दल ने दावा किया है कि हमले को उसने अंजाम दिया है। पुलिस इस दावे की जांच भी कर रही है। सूत्रों ने बताया कि पुलिस ने उस दावे का भी संज्ञान लिया है। रविवार को हुए इस हमले में जेएनयू छात्र संघ की अध्यक्ष आइशी घोष सहित कम से कम 34 लोग घायल हो गए थे।

इस हमले के सिलसिले में सबूत जुटाने के लिए फॉरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला, एफएसएल की कई टीमें मंगलवार को वहां पहुंची। सूत्रों के मुताबिक एफएसएल की भौतिकी, रसायन और जीव विज्ञान विभागों की टीमें विश्वविद्यालय में हैं। भौतिकी टीम विश्वविद्यालय परिसर में नकाबपोश लोगों द्वारा छात्रों और अध्यापकों पर हमले में इस्तेमाल किए गए सरिया और पत्थरों जैसे सबूतों को इकट्ठा करेगी, जबकि रसायन टीम वहां मौजूद रसायनों के नमूने जुटाएगी। जीव विज्ञान टीम दूसरे सबूतों सहित डीएनए नमूने इकट्ठा करेगी। एफएसएल से फोटो विशेषज्ञों की एक टीम भी परिसर में मौजूद है।

सूत्रों के मुताबिक दिल्ली पुलिस ने एफएसएल से सीसीटीवी फुटेज का विश्लेषण करने के लिए एक कंप्यूटर फॉरेंसिक टीम भेजने का अनुरोध किया है और इसके बुधवार को परिसर में पहुंचने की संभावना है। गौरतलब है कि रविवार को नकाबपोश लोगों की एक भीड़ ने जेएनयू कैंपस में घुस कर तीन छात्रावासों में छात्रों को निशाना बनाया था। उन्होंने लाठी, डंडों, हॉकी स्टिक और पत्थरों से हमला किया था। इस मामले में अज्ञात लोगों के खिलाफ एक प्राथमिकी दर्ज की गई है और क्राइम ब्रांच इस घटना की जांच कर रही है।

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