सड़कों पर जमे रहे जेएनयू के छात्र

नई दिल्ली। जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी, जेएनयू कैंपस में रविवार को हुई हिंसा के विरोध में और यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर एम जगदीश कुमार को हटाने की मांग को लेकर यूनिवर्सिटी के छात्र और शिक्षक दोनों गुरुवार को दिल्ली की सड़कों पर जमे रहे। दिल्ली पुलिस के लाख प्रयास के बावजूद देर शाम तक शिक्षक और छात्र अपनी मांग को लेकर प्रदर्शन करते रहे। छात्रों और शिक्षकों के समूह को संभालने के लिए पुलिस को जबरदस्त मशक्कत करनी पड़ी। कई जगह सुबह से लेकर देर शाम तक सड़कें बंद रहीं।

गौरतलब है कि रविवार की शाम को 50 के करीब नकाबपोश गुंडे यूनिवर्सिटी कैंपस मे घुस गए थे और उन्होंने छात्रों व शिक्षकों से मारपीट की थी। इस मारपीट में जेएनयू छात्र संघ की अध्यक्ष आइशी घोष और शिक्षिका सुचरिता सेन सहित करीब 50 लोग घायल हुए थे। इस पूरे मामले में वाइस चांसलर की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। तभी छात्र और शिक्षक उनको हटाने की मांग कर रहे हैं। जेएनयू शिक्षक संगठन का कहना है कि जब तक वीसी जगदीश कुमार रहेंगे, तब तक कैंपस में शांति नहीं बनेगी।

बहरहाल, रविवार को कैंपस में हुई हिंसा के विरोध में और वीसी को हटाने की मांग लेकर छात्र संघ और शिक्षक संगठनों ने गुरुवार को रैली निकाली और राष्ट्रपति भवन की ओर जाने का प्रयास किया। छात्र और शिक्षक जब राष्ट्रपति भवन की ओर जा रहे थे, तब पुलिस ने इन्हें रोका। इस दौरान छात्रों पर लाठीचार्ज किया गया और उन्हें बसों में भर कर वापस भेजा। प्रदर्शनकारियों ने कुलपति जगदीश कुमार के इस्तीफे की मांग की। इसके अलावा वे जेएनयू कैंपस में हिंसा के जिम्मेदार लोगों को जल्दी सजा देने और बढ़ी हॉस्टल फीस को वापस लेने की मांग कर रहे थे।

जेएनयू शिक्षक संघ के अध्यक्ष डीके लोबियाल ने गुरुवार को कहा- जेएनयू, जामिया और दिल्ली यूनिवर्सिटी के टीचर्स एसोसिएशन सहित विभिन्न सिविल सोसायटी आज के प्रोटेस्ट मार्च में शामिल हुए। हम मानव संसाधन विकास मंत्रालय के दफ्तर तक मार्च करेंगे। हमारा मुख्य उद्देश्य मंत्रालय को यह बताना है कि मौजूदा वीसी जगदीश कुमार के रहते हुए यूनिवर्सिटी में शांति नहीं रह सकती। हम उनके इस्तीफे की मांग करते हैं।

जेएनयू छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष कन्हैया कुमार ने शाम करीब पांच बजे ट्विट कर लोगों से मार्च में शामिल होने का अनुरोध किया। उन्होंने कहा- दिल्ली, भारत के छात्रों के साथ एकजुटता दिखाने के लिए अब आपकी बारी है। आइए यूनिवर्सिटी परिसर में हिंसा के खिलाफ और सरकारी शिक्षा के बचाव में मार्च करें। अपने हाथ में पोस्टर लेकर आएं और सभी नागरिकों के लिए दिल में प्यार रखें।

शाम में छात्रों और शिक्षकों ने मंडी हाउस से जंतर-मंतर की ओर विरोध मार्च निकाला। इसमें बड़ी संख्या में जेएनयू के शिक्षक और छात्र शामिल हुए। जेएनयू के पूर्व छात्र संघ अध्यक्ष कन्हैया कुमार भी इसमें शामिल हुए हैं। प्रदर्शनकारी मंडी हाउस से फिरोजशाह रोड होते हुए रायसीना रोड की ओर बढ़ रहे थे। पर पुलिस ने उनको रोक दिया। पुलिस के रोके जाने के बाद भी छात्र और शिक्षक अड़े रहे।

पांचवें दिन भी गिरफ्तारी नहीं

जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी, जेएनयू में रविवार की शाम नकाबपोश गुंडों की हिंसा के सिलसिले में पांच दिन बाद भी कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है। दिल्ली पुलिस के जानकार सूत्र दो दिन से बता रहे हैं कि नकाबपोश गुंडों की पहचान हो गई है पर अभी तक किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है। अभी तक दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच की जांच चल रही है।

इस बीच, जेएनयू प्रशासन ने पांच जनवरी को हुई हिंसा को देखते हुए सुरक्षा में खामी की जांच कराने का फैसला किया है। यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर जगदीश कुमार ने कहा कि पांच सदस्यीय कमेटी सुरक्षा में कमियों की जांच करेगी।

दूसरी ओर केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय, एमएचआरडी के सचिव अमित खरे ने कहा है कि वे शुक्रवार को वाइस चांसलर से बैठक करेंग और उसके बाद जेएनयू के छात्र संघ के सदस्‍यों से मुलाकात होगी। असल में जेएनयू के छात्र और शिक्षक दोनों वीसी को हटाने की मांग पर अड़े हैं। इस पर एमएचआरडी का कहना है कि यह समस्‍या का हल नहीं है। विभागीय सचिव अमित खरे ने यह भी कहा है कि संशोधित शुल्क लागू नहीं होने के छात्रों के दावे पर एचआरडी मंत्रालय शुक्रवार को जेएनयू वीसी से फिर बात करेगा।

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