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Sunday, April 18, 2021
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जज का प्रमोशन रूका!

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मुंबई। बांबे हाई कोर्ट की जज पुष्पा वीरेंद्र गनेडीवाला का स्थायी जज के तौर पर प्रस्तावित प्रमोशन रूक जाने की खबर है। जानकार सूत्रों के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट की कॉलेजियम ने उनकी स्थायी जज के तौर पर नियुक्ति के लिए की गई सिफारिश वापस ले ली है। गौरतलब है कि जस्टिस पुष्पा वीरेंद्र गनेडीवाला ने बच्चियों के यौन शोषण के मामले में कई विवादित फैसले दिए थे। उन्होंने कहा था कि त्वचा से त्वचा के स्पर्श के बगैर की गई किसी कार्रवाई को यौन शोषण नहीं माना जा सकता है। हालांकि इस फैसले पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी है।

बहरहाल, जानकार सूत्रों के मुताबिक यौन अपराधों से बच्चों के संरक्षण यानी पॉक्सो कानून के तहत यौन हमले की उनकी व्याख्या पर हुई आलोचनाओं के बाद उनका प्रमोशन रोकने का फैसला किया गया। जस्टिस गनेडीवाला ने 12 साल की एक बच्ची के अंग विशेष को छूने के आरोपी व्यक्ति को पिछले दिनों बरी कर दिया था और कहा था कि आरोपी ने त्वचा से त्वचा का संपर्क नहीं किया था।

इससे कुछ दिन पहले उन्होंने व्यवस्था दी थी कि पांच साल की बच्ची के हाथों को पकड़ना और ट्राउजर की जिप खोलना पॉक्सो कानून के तहत यौन अपराध नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल की इस दलील के बाद हाई कोर्ट के आदेश पर 27 जनवरी को रोक लगा दी थी कि इससे खतरनाक नजीर बन जाएगी।

सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस एसए बोबडे की अध्यक्षता वाली कॉलेजियम ने 20 जनवरी को जस्टिस गनेडीवाला को स्थायी जज बनाने के प्रस्ताव पर मुहर लगाई थी। जस्टिस गनेडीवाला ने इस महीने दो और फैसलों में नाबालिग लड़कियों से दुष्कर्म के आरोपी दो लोगों को बरी कर दिया था और कहा था कि पीड़ि‍ताओं की गवाही आरोपितों पर आपराधिक जवाबदेही तय करने का भरोसा पैदा नहीं करती।

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