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खड़गे ने प्रधानमंत्री को दिए सुझाव

नई दिल्ली। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा में नेता विपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चिट्ठी लिखी है। अपनी पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी की तर्ज पर खड़गे ने भी प्रधानमंत्री मोदी को कोरोना वायरस से लड़ने के लिए कुछ सुझाव दिए हैं।

खड़गे ने रविवार को लिखे पत्र में कहा कि सरकार को वैक्सीन और चिकित्सा उपकरणों पर टैक्स में छूट देनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि वैक्सीनेशन के लिए आवंटित किए गए 35 हजार करोड़ रुपए को खर्च किया जाए और ये सुनिश्चित करना चाहिए की देश के हर व्यक्ति का वैक्सीनेशन हो सके।

मल्लिकार्जुन खड़गे ने प्रधानमंत्री को यह भी सुझाव दिया कि विदेशों से आ रही राहत सामग्री को बंटवाने के लिए प्रवासी मजदूरों की मदद ली जानी चाहिए। उन्होंने यह काम मनरेगा के तहत करवाने का सुझाव दिया। गौरतलब है कि हाल ही के दिनों में कांग्रेस नेता राहुल गांधी और पार्टी की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी के बाद प्रधानमंत्री मोदी को पत्र लिखने वाले खड़गे तीसरे कांग्रेस नेता हैं।

उन्होंने वैक्सीनेशन की रफ्तार बढ़ाने के लिए वैक्सीन बनाने वाली कंपनियों को अनिवार्य रूप से लाइसेंस देने की वकालत की। उन्होंने चिकित्सा उपकरणों पर टैक्स में छूट देने की भी अपील की है। अभी वैक्सीन पर पांच फीसदी जीएसटी लिया जा रहा है। इसके अलावा पीपीआई किट्स, ऑक्सीजन कंसंट्रेटर और एंबुलेंस पर 12 से 28 फीसदी टैक्स है। खड़गे ने इनमें छूट देने की मांग की। उन्होंने गरीबों की आर्थिक मदद के लिए प्रवासी मजदूरों को मनरेगा के तहत एक सौ की जगह दो सौ दिन का रोजगार देने की मांग की।

सोनिया गांधी की तरह खड़गे ने भी केंद्र सरकार को तुरंत सभी पार्टियों की मीटिंग बुलाने को कहा ताकि महामारी से लड़ने के लिए सबकी सहमति से एक ब्लूप्रिंट तैयार हो सके। खड़गे ने लिखा है कि ये सब की सहमति को ध्यान में रखते हुए सामूहिक निर्णय लेने का समय है। सिटीजन ग्रुप और सिविल सोसायटी के लोग कोरोना से लंबी लड़ाई लड़ रहे हैं। ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि केंद्र सरकार अपने कर्तव्यों का पालन करती नहीं दिख रही है। उन्होंने लिखा- आम भारतीय आज इस स्थिति में पहुंच चुका है कि उसे अपनों का इलाज करने के लिए जमीन, गहनें बेचने पड़ रहे हैं। लोगों को अपनी जमापूंजी खर्च करनी पड़ रही है।

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बेबाक विचार | डा .वैदिक कॉलम

यह कैसा धर्मांतरण है ?

Conversion

उत्तर प्रदेश के आतंकवाद निरोधक दस्ते ने धर्मांतरण के एक बहुत ही घटिया षड़यंत्र को धर दबोचा है। ये षड़यंत्रकारी कई गरीब, अपंग, लाचार और मोहताज़ लोगों को मुसलमान बनाने का ठेका लिये हुए थे। इन मजहब के दो ठेकेदारों— उमर गौतम और जहांगीर आलम कासमी— को गिरफ्तार किए जाने के बाद पता चला है कि उन्होंने एक हजार लोगों को मुसलमान बनाया है।कैसे बनाया है ? उन्हें कुरान शरीफ के उत्तम उपदेशों को समझा कर नहीं, इस्लाम के क्रांतिकारी सिद्धांतों को समझाकर नहीं और पैगंबर मोहम्मद के जीवन के प्रेरणादायक प्रसंगों को बताकर नहीं, बल्कि लालच देकर, डरा-धमकाकर, हिंदू धर्म की बुराईयां करके। नोएडा के एक मूक-बधिर आवासी स्कूल के बच्चों को फुसलाकर योजनाबद्ध ढंग से उनका धर्मांतरण करवाया गया और उनकी शादी मुस्लिम लड़कियों से करवा दी गई।

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यह काम सिर्फ दिल्ली और नोएडा में ही नहीं हुआ, महाराष्ट्र, केरल, आंध्र, हरियाणा और उत्तरप्रदेश में भी इस षड़यंत्र के तार फैले हुए हैं। इस घटिया काम की जांच में यह पाया गया कि उन्हें भरपूर पैसा भी मिलता रहा। इस पैसे के स्त्रोत आईएसआईएस और कुछ अन्य विदेशी एजेन्सियां भी रही हैं। इस राष्ट्रविरोधी काम को अंजाम देने का खास जिम्मा उठा रखा था, उमर गौतम ने। इसका असली नाम श्यामप्रकाश सिंह गौतम था। इसने एक मुसलमान लड़की से शादी की और कुछ वर्ष पहले मुसलमान बनने पर धर्मांतरण का काम जोर-शोर से शुरु कर दिया।

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Religious Conversion For Five Lakh - मात्र पांच लाख रुपए के लिए हिंदू से बन  गया ईसाई | Patrika News

गौतम से कोई पूछे कि तुम खुद मुसलमानों क्यों बने थे? क्या इस्लाम की अच्छाइयों या पैगंबर के जीवन से प्रेरणा लेकर तुम मुसलमान बने थे ? जितने लोगों को तुमने मुसलमान बनाया है, क्या वे इस्लाम के सिद्धांतों को समझते हैं और क्या वे अपने जीवन में उनका पालन करते हैं ? यदि कोई व्यक्ति किसी मजहब के सिद्धांतों को समझ कर अपना धर्म-परिवर्तन करता है तो उसका यह अधिकार है। ऐसा करने से उसे कोई रोक नहीं सकता लेकिन जोर-जबर्दस्ती, लालच और वासना के कारण जो धर्मांतरण होता है, वह निकृष्ट कोटि का अधर्म है।

खुद कुरान शरीफ के अध्याय 2 और आयत 256 में कहा गया है कि ‘‘मजहब में जबर्दस्ती का कोई स्थान नहीं है।’’ जो धर्मांतरण गौतम और कासमी करते रहे हैं, क्या वह इस कसौटी पर खरा उतरता है? महर्षि दयानंद, स्वामी विवेकानंद और महात्मा गांधी ने भी ईसाई पादरियों द्वारा किए जा रहे धर्म-परिवर्तन का कड़ा विरोध किया था। वास्तव में यह धर्मांतरण नहीं, धर्म का कलंकरण है। भारत के कई राज्यों ने ऐसे अनैतिक धर्मांतरण के विरुद्ध कठोर कानून बना रखे हैं।

ऐसे ही कानून के तहत उक्त लोगों के खिलाफ पुलिस ने कार्रवाई की है। वास्तव में ऐसे धर्मांतरण में धर्म कम, राजनीति ज्यादा होती है। अंग्रेज ने अपनी राजनीतिक सत्ता मजबूत करने के लिए जैसे ईसाइयत को साधन बनाया था और तुर्कों व मुगलों ने इस्लाम का इस्तेमाल किया था, वैसे ही आजकल कई छुटभय्ये अपनी तुच्छ स्वार्थ-सिद्धि के लिए मजहब का इस्तेमाल करते रहते हैं।

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