किसान और सरकार दोनों अड़े!

नई दिल्ली।  केंद्र सरकार के बनाए तीन कृषि कानूनों के विरोध में प्रदर्शन कर रहे किसानों के साथ केंद्र सरकार की वार्ता एक बार फिर विफल हो गई है। सरकार और किसान दोनों अपनी-अपनी बातों पर अड़ गए हैं। किसानों का कहना है कि तीनों कानूनों में खामी है और इसे रद्द करने के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं है। दूसरी ओर सरकार न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी एमएसपी पर गारंटी देने को तैयार है पर कानूनों को रद्द करने के बारे में कोई विचार करने को राजी नहीं है।

गौरतलब है कि कई राज्यों के किसान पिछले 10 दिन से दिल्ली की सीमा पर प्रदर्शन कर रहे हैं। शनिवार को प्रदर्शन के 10वें दिन किसानों की सरकार से पांचवें दौर की बातचीत हुई, जिसमें कोई नतीजा नहीं निकला। अब एक बार फिर नौ दिसंबर को अगले दौर की वार्ता होगी। शनिवार की बातचीत में केंद्र सरकार की ओर से शामिल तीन केंद्रीय मंत्रियों के आगे एक समय ऐसा भी आया, जब किसानों ने मौन व्रत धारण कर लिया और कहा कि सरकार सिर्फ हां या ना में इस बात का जवाब दे कि वह कानूनों को रद्द करेगी या नहीं।

बहरहाल, शनिवार की बैठक से पहले उम्मीद जताई जा रही थी कि इसमें कोई हल निकलेगा। पर ऐसा नहीं हुआ। फिर सरकार की ओर से नौ दिसंबर को वार्ता का प्रस्ताव रखा गया, जिसे किसान संगठनों ने स्वीकार कर लिया। अब नौ दिसंबर को सुबह 11 बजे छठे दौर की वार्ता होगी। से शुरू होगी। इससे पहले दिल्ली के विज्ञान भवन में शनिवार की मीटिंग में 40 किसान पहुंचे थे। पिछली बैठक की तरह ही इस बार भी किसानों ने लंच ब्रेक में सरकार की ओर से दिया गया खाना नहीं खाया। किसान पानी भी अपना लेकर गए थे।

सरकार से चर्चा के दौरान किसान इस बात से नाराज थे कि सिर्फ बातें हो रही हैं और सरकार की ओर से कोई ठोस प्रस्ताव नहीं दिया जा रहा है। उन्होंने भड़क कर कह दिया कि सरकार मांगे पूरी करे, नहीं तो मीटिंग छोड़ कर चले जाएंगे। वार्ता के दौरान केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने किसानों से अपील करते हुए कहा कि आप वरिष्ठ नागरिकों और बच्चों से घरों को लौटने के लिए कहिए। पर किसान कृषि मंत्री की इस अपील पर राजी नहीं हुए। किसान संगठनों ने आठ दिसंबर को भारत बंद का ऐलान किया है।

किसानों ने तीनों कानूनों का विरोध करते हुए कहा है कि वे कॉरपोरेट फार्मिंग नहीं चाहते। उन्होंने कहा- इस कानून से सरकार को फायदा होगा, किसानों को नहीं। हम पिछले कई दिनों से सड़कों पर हैं। हमारे पास एक साल की व्यवस्था है। अगर सरकार यहीं चाहती है तो हमें कोई दिक्कत नहीं। किसानों ने कहा- हम हिंसा का रास्ता भी नहीं अपनाएंगे। इंटेलीजेंस ब्यूरो आपको बता देगी कि हम धरनास्थल पर क्या कर रहे हैं। साथ ही कहा कि अब और बातचीत नहीं चाहते, सरकार समाधान निकाले।

प्रधानमंत्री ने की मंत्रियों से बात

कृषि कानूनों के विरोध में चल रहे किसान आंदोलन का समाधान निकालने के लिए शनिवार को खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कमान संभाली। प्रधानमंत्री ने सरकार के वरिष्ठ मंत्रियों के साथ लंबी बैठक की। जानकार सूत्रों के मुताबिक किसानों के साथ कृषि मंत्री की बैठक शुरू होने से पहले प्रधानमंत्री ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ बैठक की। इसमें कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर और रेल मंत्री पीयूष गोयल भी मौजूद थे।

बताया जा रहा है कि इस बैठक में प्रदर्शनकारी किसान संगठनों के सामने रखे जाने वाले संभावित प्रस्तावों पर विचार विमर्श किया गया। इससे पहले राजनाथ सिंह और अमित शाह ने केंद्रीय मंत्रियों के साथ इस विषय पर चर्चा की। केंद्रीय मंत्रियों के साथ प्रधानमंत्री की चर्चा से अंदाजा लगा रहा है कि सरकार इस आंदोलन को अब गंभीरता से ले रही है और जल्दी से जल्दी इसे खत्म कराना चाहती है। प्रधानमंत्री ने पहली बार इस मसले पर इस स्तर पर विचार विमर्श किया। गौरतलब है कि किसानों ने आठ दिसंबर को भारत बंद का आह्वान किया है।

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