किसान संसद व ट्रैक्टर रैली होगी

नई दिल्ली। केंद्र सरकार के बनाए तीन कृषि कानूनों का विरोध कर रहे किसान संगठनों ने मंगलवार को एक अहम बैठक की, जिसमें आगे की रणनीति बनाई गई। सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई और सुप्रीम कोर्ट की बनाई कमेटी की पहली बैठक से एक दिन पहले मंगलवार को किसानों ने अपनी बैठक में तय किया कि 23 और 24 जनवरी को किसान संसद का आयोजन किया जाएगा। किसानों ने यह भी स्प्ष्ट कर दिया कि 26 जनवरी को पहले से तय कार्यक्रम के तहत ट्रैक्टर परेड भी निकाली जाएगी।

पिछले 55 दिन से आंदोलन पर बैठे किसानों कहा कि 23 और 24 जनवरी को सिंघु बॉर्डर के पास गुरु तेग बहादुर मेमोरियल में किसान संसद का आयोजन किया जाएगा। इसमें आंदोलन से जुड़े सभी मुद्दों के अलावा न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी एमएसपी पर भी बात होगी। सुप्रीम कोर्ट के कुछ रिटायर जज, कुछ पूर्व सांसद और कुछ पूर्व अधिकारी इसमें शामिल होंगे। इनके अलावा सुप्रीम कोर्ट के वकील प्रशांत भूषण, पत्रकार पी साईंनाथ और सामाजिक कार्यकर्ता मेधा पाटकर भी इसमें शामिल होंगे।

इस बीच, मंगलवार को किसानो ने दिल्ली पुलिस के साथ भी मीटिंग की, जिसमें 26 जनवरी को ट्रैक्टर परेड निकालने के बारे में बातचीत हुई। किसानों ने दिल्ली पुलिस से कहा कि वे तय कार्यक्रम के मुताबिक ही दिल्ली में ट्रैक्टर परेड निकालेंगे। क्रांतिकारी किसान यूनियन के अध्यक्ष दर्शन पाल ने कहा कि उन्होंने अधिकारियों को भरोसा दिया है कि ट्रैक्टर मार्च शांतिपूर्ण होगा। पुलिस ने किसानों से कहा कि वे इस बारे में विचार करेंगे और इस मुद्दे पर अगले एक-दो दिन में अगली मीटिंग हो सकती है।

इस बीच खबर है कि सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे ने 30 जनवरी से किसानों के समर्थन में रामलीला मैदान में अनशन शुरू करने का ऐलान किया है। उधर टिकरी बॉर्डर पर चल रहे आंदोलन में एक और किसान ने खुदकुशी की कोशिश की। किसान रोहतक का रहने वाला है। उसका नाम जय भगवान राणा है। उसने मंगलवार को जहरीला पदार्थ खा लिया था। किसान की हालत गंभीर है। जय भगवान ने अपने सुसाइड नोट में लिखा है कि अब यह आंदोलन मूंछों की लड़ाई बन गया है। सरकार और किसान दोनों मानने को तैयार नहीं हैं। इसे खत्म करने के लिए दोनों पक्षों को इच्छा शक्ति दिखाना होगा।

किसानों से वार्ता चाहती कमेटी

केंद्र सरकार के बनाए तीन कृषि कानूनों और उनके विरोध में हो किसान आंदोलन के बारे में रिपोर्ट देने के लिए बनाई गई सुप्रीम कोर्ट की कमेटी की पहली बैठक मंगलवार को हुई। हालांकि इस कमेटी के चार सदस्यों में से एक सदस्य भूपिंदर सिंह मान कमेटी छोड़ चुके हैं। इस बारे में हो सकता है कि बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हो। सुप्रीम कोर्ट ने किसान आंदोलन और कृषि कानूनों से जुड़ी कई याचिकाएं लंबित हैं। सोमवार को अदालत ने किसानों के ट्रैक्टर मार्च से जुड़े मुद्दे पर सुनवाई के दौरान कहा था कि वह बुधवार को सभी मुद्दों पर सुनवाई करेगी।

बहरहाल, मंगलवार को हुई पहली मीटिंग में किसानों से बातचीत के लिए 21 जनवरी की तारीख तय की गई। कमेटी में शामिल शेतकरी संगठन अनिल घनवंत ने कहा कि जो किसान खुद आकर कमेटी से मिलना चाहते हैं, उनसे आमने-सामने मीटिंग की जाएगी। जो नहीं आ सकते हैं, उनके साथ वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए बात होगी। उन्होंने कहा- अगर सरकार भी हमारे साथ बात करना चाहती है, तो उसका भी स्वागत है। हम सरकार को भी सुनेंगे। उन्होंने कहा- सबसे बड़ी चुनौती आंदोलनकारी किसानों को बैठक के लिए तैयार करने की है। हम अपने लेवल पर पूरी कोशिश करेंगे।

गौरतलब है कि किसान संगठनों ने पहले ही साफ कर दिया है कि वे सुप्रीम कोर्ट की बनाई कमेटी के सामने नहीं जाएंगे। मंगलवार को भी भारतीय किसान यूनियन के प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने जो कमेटी बनाई है, उसकी मीटिंग में नहीं जाएंगे। उन्होंने यह भी कहा कि कोई आंदोलनकारी कोर्ट नहीं गया था। सरकार ने अध्यादेश के जरिए संसद में बिल पेश किया था, यह उसी रास्ते वापस होगा।

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