दिल्ली दंगों को सियासी बनाया गया: शाह

नई दिल्ली ।  केंद्रीय गृह मंत्री ने दावा किया है कि दिल्ली में हुई सांप्रदायिक हिंसा का सियासी इस्तेमाल किया गया। उन्होंने बुधवार को लोकसभा में हुई चर्चा का जवाब देते हुए कहा कि इन दंगों को राजनीतिक रंग देने का प्रयास किया गया और इसे एक खास धर्म से जोड़ा गया। दंगों के बाद लोगों के निशाने पर आई दिल्ली पुलिस का बचाव करते हुए उन्होंने कहा कि पुलिस का काम लोगों की हिफाजत करना था, जो कि उसने बखूबी किया। अमित शाह के जवाब के बीच में ही कांग्रेस और दूसरी विपक्षी पार्टियों ने सदन से वाकआउट किया।

गौरतलब है कि बुधवार को लोकसभा में दिल्ली के दंगों पर चर्चा हुई और गुरुवार को राज्यसभा में चर्चा होगी। विपक्ष बजट सत्र का दूसरा चरण शुरू होने के पहले दिन से चर्चा की मांग कर रहा था और सरकार अड़ी थी कि होली के बाद ही चर्चा होगी। इस वजह से पहले हफ्ते में कोई कामकाज नहीं हो सका।

बहरहाल, लोकसभा में बुधवार को हुई चर्चा का जवाब देते हुए शाह ने कहा- अधीर रंजन जी ने कहा कि खून की होली अभी भी चल रही है। मैंने पहले ही कहा कि 25 फरवरी को रात 11 बजे के बाद एक भी हिंसा की घटना नहीं हुई। जब दंगों की बात हो, पुलिस मैदान में जूझ रही हो, उस वक्त हमें वास्तविकता को समझना चाहिए। शाह ने कहा- पुलिस का सबसे बड़ा काम था, लोगों की हिफाजत का। दिल्ली पुलिस ने इसे बखूबी निभाया।  शाह ने कहा- 24 फरवरी को दो बजे के आसपास पहली सूचना मिली थी और अंतिम सूचना 25 फरवरी को 11 बजे मिली। ज्यादा से ज्यादा 36 घंटे ये दंगे चले। इसे 36 घंटे में खत्म करने का काम दिल्ली पुलिस ने किया। लोकसभा में कांग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी को निशाना बनाते हुए शाह ने ने कहा- चौधरी ने कहा कि मैं ट्रंप के कार्यक्रम में बैठा था। वहां मेरा जाना तय था, मैं जब वहां गया उस वक्त कोई घटना नहीं हुई। मैं साढ़े छह बजे आ गया था।  उन्होंने कहा- मैं कहीं नहीं गया। दूसरे दिन राष्ट्रपति भवन पर ट्रंप की अगवानी, लंच, डिनर में भी मैं नहीं गया। पूरा समय मैं दिल्ली पुलिस के साथ बैठ कर दंगों पर काबू पाने की योजना पर काम कर रहा था।

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