नसबंदी का आदेश हुआ वापिस

भोपाल। राज्य सरकार के स्वास्थ्य कर्मचारियों को नसबंदी के बारे में दिए गए आदेश पर विवाद होने के बाद कमलनाथ सरकार ने इस आदेश को वापस ले लिया है। गौरतलब है कि कमलनाथ सरकार ने स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों को हर महीने पांच से 10 पुरुषों का नसंबदी ऑपरेशन कराने का आदेश दिया था। ऐसा नहीं करने वाले कर्मचारियों को हटा देने की चेतावनी दी गई थी। विवाद बढ़ने के बाद इसे वापस ले लिया गया। राज्य के स्वास्थ्य मंत्री तुलसीराम सिलावट ने यह जानकारी दी। विपक्षी पार्टियों ने इसे अघोषित आपातकाल कहा था।

इस बीच राज्य सरकार ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की राज्य निदेशक छवि भारद्वाज को पद से हटा दिया है। असल में, भारद्वाज ने ही अपने आदेश में कहा था कि कर्मचारियों को टारगेट पूरा नहीं करने पर नो वर्क, नो पे के आधार पर वेतन नहीं दिया जाएगा। इतना ही नहीं कर्मचारियों को अनिवार्य रिटायरमेंट दे दी जाएगी। राज्य सरकार का यह आदेश आने के बाद पूरे देश में इस पर विवाद शुरू हो गया था।

पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कांग्रेस सरकार के इस आदेश की तुलना इमरजेंसी के दौरान संजय गांधी के नसबंदी अभियान से की थी। गौरतलब है कि परिवार नियोजन के अभियान के तहत हर साल प्रदेश के जिलों को कुल आबादी के 0.6 फीसदी नसबंदी ऑपरेशन का टारगेट दिया जाता है। इंदौर में यह टारगेट 22 हजार ऑपरेशन का है। कुछ जिले इसे हासिल कर भी लेते हैं, लेकिन इनमें पुरुषों की सहभागिता बहुत कम है।

हाल ही में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की संचालक छवि भारद्धाज ने इस पर नाराजगी जताते हुए सभी कलेक्टर और मुख्य चिकित्सा व स्वास्थ्य अधिकारियों को पत्र लिखा। इसमें भारद्वाज ने कहा- प्रदेश में मात्र 0.5 फीसदी पुरुष नसबंदी के ऑपरेशन किए जा रहे हैं। अब ‌विभाग के पुरुषकर्मियों को जागरूकता अभियान के तहत परिवार नियोजन का टारगेट दिया जाए। इस पत्र के बाद इंदौर सीएमएचओ कार्यालय ने पत्र जारी कर कर्मचारियों से कहा कि अगर टारगेट के तहत काम नहीं किया तो अनिवार्य रिटायरमेंट के प्रस्ताव भेजेंगे।

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