महाराष्ट्र में सरकार बनाने का दावा जल्दी!

मुंबई। महाराष्ट्र में शिव सेना, एनसीपी और कांग्रेस के नेता

सरकार बनाने के लिए जल्दी ही दावा कर सकते हैं।

तीनों पार्टियों ने सरकार की रूपरेखा को लेकर लगातार दो दिन बैठक की है

और उसके बाद शुक्रवार को एनसीपी नेता शरद पवार ने कहा कि

राज्यपाल से मुलाकात के लिए समय मांगा गया है।

उन्होंने दावा किया कि तीनों पार्टियों मिल कर सरकार बनाएंगी और सरकार पांच साल चलेगी।

माना जा रहा है कि अगले हफ्ते किसी दिन नई सरकार शपथ ले सकती है।

फिलहाल महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन लागू है।

इससे पहले गुरुवार और शुक्रवार को तीनों पार्टियों के नेताओं की आपस में बातचीत हुई,

जिसके बाद शुक्रवार को शरद पवार ने कहा- सरकार बनाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है।

उन्होंने यह भी कहा कि सरकार पांच साल पूरे करेगी।

एनसीपी सुप्रीमो ने कहा- तीनों पार्टियां स्थिर सरकार चाहती हैं,

जिनका मकसद विकास करना होगा।

उन्होंने दावा किया कि राज्य में मध्यावधि चुनाव की कोई गुंजाइश नहीं है।

उन्होंने कहा- यह सरकार बनेगी और अपना पांच सालों का कार्यकाल पूरा करेगी।

हम सभी यह सुनिश्चित करते हैं कि सरकार पांच साल तक चलेगी।

पिछले दिनों पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा नेता देवेंद्र फड़नवीस ने कहा था

कि शिवसेना-एनसीपी-कांग्रेस का गठबंधन छह महीने से ज्यादा नहीं चलेगा।

इस बारे में पूछे जाने पर पवार ने कहा- मैं देवेंद्र जी को कुछ सालों से जानता हूं।

मगर मुझे इस बात का पता नहीं था कि वे एक ज्योतिषी भी हैं।

बहरहाल, एनसीपी ने साफ कर दिया है कि मुख्यमंत्री शिव सेना का ही होगा।

एनसीपी के प्रवक्ता नवाब मलिक ने कहा कि मुख्यमंत्री के मसले पर ही शिव सेना ने

भाजपा से तालमेल तोड़ा है इसलिए उनके सम्मान और स्वाभिमान का पूरा ख्याल रखा जाएगा।

शिव सेना के प्रवक्ता संजय राउत ने भी दावा किया कि पूरे कार्यकाल के लिए शिव सेना का ही मुख्यमंत्री बनेगा।

एनसीपी प्रवक्ता नवाब मलिक ने कहा- महाराष्ट्र में सरकार बनाने के लिए सभी दलों को साथ आना होगा।

लेकिन कांग्रेस इससे कुछ हिचकिचा रही है। साझा कार्यक्रम का ड्राफ्ट सोनिया गांधी को भेजा गया है। अगर वो साथ नहीं आएगी तो सरकार नहीं बनाएंगे। उन्होंने यह भी कहा कि राष्ट्रपति शासन लगने से प्रशासनिक व्यवस्थाएं पूरी तरह ठप्प हो गई हैं। राज्य के किसान परेशान हैं, उन्हें फसल की बुआई करनी है। तीनों पार्टियों ने इस मुद्दे पर राष्ट्रपति से मुलाकात करने की योजना बनाई है।

 

तीन पार्टियों ने बनाया साझा कार्यक्रम

महाराष्ट्र में सरकार बनाने के लिए शिव सेना, एनसीपी और कांग्रेस के बीच दो दिन हुई समन्वय बैठकों के बाद कहा जा रहा है कि तीनों पार्टियों नेसाझा न्यूनतम कार्यक्रम, सीएमपी बना लिया है। बताया जा रहा है कि तीनों पार्टियों ने सरकार बनाने का फार्मूला तय कर लिया है।तीनों पार्टियों ने मंत्री पद के बंटवारे के साथ साथ दूसरे तमाम मुद्दों पर सहमति बनाई है। कहा जा रहा है कि सरकार बनाने और चलाने के लिए शिव सेना को सावरकर का समर्थन बंद करना होगा तो कांग्रेस भी इस बात पर राजी हुई है कि वह गोडसे का मामला नहीं उठाएगी।

जानकार सूत्रों के मुताबिक तीनों पार्टियां सरकार में शामिल होंगी। मंत्रियों की संख्या के बारे में यह तय हुआ है कि शिव सेना और एनसीपी के 14-14 मंत्री होंगे, जबकि कांग्रेस के 12 मंत्री और साथ में कांग्रेस को विधानसभा अध्यक्ष का पद भी देने की बात है। कांग्रेस को इसलिए भी अध्यक्ष पद दिया जा रहा है क्योंकि शिव सेना और एनसीपी दोनों विधानसभा अध्यक्ष के मामले में अभी भी एक दूसरे पर शक कर रहे हैं।

शिवसेना, एनसीपी और कांग्रेस के बीच जो साझा न्यूनतम कार्यक्रम बना है, उसमें शिव सेना को सावरकर को भारत रत्न देने जैसे मांगें छोड़नी होगी। अयोध्या जैसे मामले पर भी शिव सेना को थोड़ा संयम बरतने की सलाह कांग्रेस और एनसीपी के तरफ से दी गई है। इसके अलावा महाराष्ट्र में मुसलमानों को पांच फीसदी आरक्षण फिर से लागू करना होगा। नई औद्योगिक नीति में स्थानीय युवाओं का आरक्षण तय किया जाएगा। यह शिव सेना की मांग रही है। किसानों की कर्ज माफी भी होगी। प्रचार के दौरान ही शरद पवार इसकी मांग करते रहे हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Shares