फड़णवीस ने दिया इस्तीफा

मुंबई।  शिवसेना के आक्रामक तेवरों के चलते देवेंद्र फड़णवीस ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया है। भाजपा नेता सुधीर मुनगंतीवार ने कहा कि गठबंधन टूटा नहीं है और  शिवसेना को जनादेश का सम्मान करना चाहिए। फड़णवीस ने राजभवन जाकर राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी को इस्तीफा सौंपा जिन्होंने वैकल्पिक इंतजाम होने तक उनसे ‘कार्यवाहक मुख्यमंत्री’ बने रहने को कहा है।

राज्यपाल से मुलाकात के बाद फड़णवीस ने संवाददाताओं से कहा,वैकल्पिक व्यवस्था कुछ भी हो सकती है, वो नयी सरकार हो सकती है या राष्ट्रपति शासन लगना भी हो सकता है। फड़णवीस ने कहा कि राज्यपाल ने मेरा इस्तीफा स्वीकार कर लिया है। मैं पांच सालों तक सेवा करने का मौका देने के लिये महाराष्ट्र के लोगों का शुक्रिया अदा करता हूं।

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फड़णवीस ने विधानसभा चुनावों के बाद सरकार गठन में गतिरोध को लेकर सहयोगी शिवसेना पर निशाना साधा। शिवसेना के दावों को खारिज करते हुए फड़णवीस ने कहा कि ‘उनकी मौजूदगी में’ कोई फैसला नहीं लिया गया कि दोनों दल मुख्यमंत्री पद साझा करेंगे। उन्होंने कहा, मैं एक बार फिर यह स्पष्ट करना चाहता हूं कि यह कभी तय नहीं किया गया कि मुख्यमंत्री पद साझा किया जाएगा। इस मुद्दे पर कभी फैसला नहीं लिया गया। यहां तक की (भाजपा अध्यक्ष) अमित शाह जी और (वरिष्ठ भाजपा नेता) नितिन गडकरी जी ने कहा कि यह फैसला कभी नहीं लिया गया था। फड़णवीस ने कहा कि उन्होंने गतिरोध तोड़ने के लिये शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे को फोन किया लेकिन उद्धव जी ने मेरा फोन नहीं उठाया। उन्होंने कहा कि भाजपा से बात नहीं करने और विपक्षी कांग्रेस व राकांपा से बात करने की शिवसेना की ‘नीति’ गलत थी।

फड़णवीस के संवाददाता सम्मेलन के थोड़ी देर बाद ही शिवसेना अध्यक्ष उद्धव ठाकरे ने सहयोगी दल भाजपा को, उन्हें ‘झूठा साबित करने’ के प्रयास के लिए आड़े हाथ लिया और दावा किया कि अमित शाह के साथ उनकी बातचीत के दौरान पार्टी महाराष्ट्र में मुख्यमंत्री का पद साझा करने पर सहमत हुई थी। ठाकरे ने कहा कि वह अपने पिता एवं शिवसेना संस्थापक दिवंगत बाल ठाकरे से राज्य में शिवसेना का मुख्यमंत्री होने के बारे में किया वादा पूरा करेंगे। ठाकरे ने कहा कि उन्हें इसके लिए देवेंद्र फड़णवीस या शाह की जरूरत नहीं है।  शिवसेना अध्यक्ष ने एक बार फिर कहा कि उन्हें इससे ठेस लगी है कि भाजपा ने उन्हें एक झूठे के तौर पर पेश करने का प्रयास किया।

वहीं राकांपा प्रमुख शरद पवार ने इससे पहले दिन में सवाल उठाया कि राज्यपाल सबसे ज्यादा सीट वाले दल को सरकार बनाने के लिये बुला क्यों नहीं रहे हैं। पवार ने कहा, “महाराष्ट्र जैसे राज्य में ऐसी स्थिति नहीं बननी चाहिए। उन्होंने (अठावले ने) सलाह मांगी थी। हमारी आम राय थी कि लोगों ने भाजपा और शिवसेना को स्पष्ट बहुमत दिया है।”

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