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Wednesday, May 12, 2021
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नेपाल में सुप्रीम कोर्ट ने बहाल की संसद

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काठमांडो। भारत के पड़ोसी देश नेपाल में एक बड़ा घटनाक्रम में सुप्रीम कोर्ट ने प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को बड़ा झटका दिया है। सर्वोच्च अदालत ने ओली के उस फैसले को रद्द कर दिया है, जिसमें उन्होंने 20 दिसंबर को नेपाल की संसद के प्रतिनिधि सभा को भंग करने की घोषणा की थी। अदालत ने प्रतिनिधि सभा को फिर से बहाल करने का निर्देश दिया है। साथ ही 13 दिनों के भीतर सदन की बैठक बुलाने का आदेश दिया है।

गौरतलब है कि संसद भंग करने के फैसले के खिलाफ नेपाली सुप्रीम कोर्ट में अलग-अलग 12 याचिका दायर की गई थी। सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की संवैधानिक बेंच इस पर सुनवाई कर रही थी। चोलेंद्र शमशेर राणा की अगुवाई वाली पांच सदस्यीय संवैधानिक पीठ ने सोमवार को फैसला सुनाया। पिछले शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में बहस के दौरान न्याय मित्र की ओर से पेश पांच वकीलों ने कहा था कि सदन को भंग करने का प्रधानमंत्री ओली का फैसला असंवैधानिक था।

प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली के संसद भंग करने की सिफारिश को राष्ट्रपति विद्या देवी भंडारी ने पिछले साल 20 दिसंबर को मंजूरी दे दी थी। उन्होंने दो चरणों में चुनाव कराने का ऐलान किया था। इस दौरान नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी के वरिष्ठ नेता पुष्प कमल दहल उर्फ प्रचंड के खेमे के सात मंत्रियों ने भी इस्तीफा दे दिया था। दहल लगातार ओली पर इस्तीफे के लिए दबाव बना रहे थे। ओली अपनी ही पार्टी में नेतृत्व की चुनौती से जूझ रहे थे। उनके ऊपर पार्टी अध्यक्ष और प्रधानमंत्री का पद छोड़ने का दबाव बढ़ता जा रहा था। इसी वजह से उन्होंने संसद भंग करने की सिफारिश कर दी थी, जिसे राष्ट्रपति ने मंजूर कर लिया था।

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