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दो नए केंद्र शासित प्रदेश बने

श्रीनगर। जम्मू कश्मीर 31 अक्टूबर को दो केंद्र शासित प्रदेशों में बदल गया। जम्मू कश्मीर और लद्दाख के अलग-अलग केंद्र शासित प्रदेश बनने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि ‘नई व्यवस्था’ का लक्ष्य ‘विश्वास की मजबूत कड़ी’ बनाना है। मगर कश्मीर घाटी में पिछले 88 दिनों की तरह बृहस्पतिवार को भी बंद रहा। श्रीनगर में जी सी मुर्मू ने जम्मू कश्मीर और आर के माथुर ने लेह में लद्दाख के उपराज्यपाल पद की शपथ ली। उधर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने राज्य में लगे राष्ट्रपति शासन को समाप्त करते हुए नए गठित किए गए दो केंद्रशासित प्रदेशों-जम्मू कश्मीर एवं लद्दाख का नियंत्रण अपने हाथों में लिया।

त्रिपुरा के 1997 बैच के आईएएस अधिकारी और पूर्व रक्षा सचिव माथुर को लद्दाख की राजधानी में सिंधु संस्कृति ऑडिटोरियम में एक समारोह में जम्मू कश्मीर हाईकोर्ट की मुख्य न्यायाधीश गीता मित्तल ने शपथ दिलाई। इस समारोह में लेह और करगिल पर्वतीय विकास परिषद के अधिकारी, सेना और अर्द्धसैनिक बल, धार्मिक नेता और आम लोग शामिल हुए। जम्मू कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश में पांच साल की अवधि के लिए मुख्यमंत्री के नेतृत्व में निर्वाचित विधानसभा और मंत्रिपरिषद होगी जबकि लद्दाख का शासन उपराज्यपाल के जरिए सीधे केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा चलाया जाएगा। दोनों केंद्र शासित प्रदेशों का साझा हाईकोर्ट होगा।

लद्दाख अधिकारियों की नियुक्ति के लिए केंद्रीय लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) के दायरे में आएगा। जम्मू कश्मीर में राजपत्रित सेवाओं के लिए भर्ती एजेंसी के तौर पर लोक सेवा आयोग (पीएससी) बना रहेगा।  नए केंद्र शासित प्रदेशों के सरकारी कर्मचारियों को सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों के अनुसार ही वेतन तथा अन्य लाभ मिलने शुरू होंगे। यह पहली बार है जब किसी राज्य को विभाजित कर दो केंद्र शासित प्रदेश बना दिए गए हैं। देश में अब राज्यों की कुल संख्या 28 होगी जबकि केंद्र शासित प्रदेश बढ़कर नौ हो जाएंगे। जम्मू कश्मीर का संविधान और रणबीर दंड संहिता का अस्तित्व बृहस्पतिवार को उस समय खत्म हो गया जब देश ने पहले गृह मंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल की वर्षगांठ पर ‘राष्ट्रीय एकता दिवस’ मनाया। पटेल को 560 से अधिक रियासतों के भारत संघ में विलय का श्रेय जाता है।

चीन ने किया विरोध

चीन ने जम्मू-कश्मीर को दो केंद्र शासित प्रदेशों में बांटे जाने के कदम पर आपत्ति जताई और इसे ‘गैर कानूनी और अमान्य’ बताया। चीन ने कहा कि अपने प्रशासनिक अधिकार क्षेत्र में चीन के कुछ क्षेत्र को ‘शामिल’ करने संबंधी भारत के फैसले ने बीजिंग की संप्रभुता को ‘चुनौती’ दी है। भारत सरकार ने जम्मू कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 के ज्यादातर प्रावधानों को हटाने और राज्य को दो केन्द्र शासित प्रदेशों जम्मू कश्मीर और लद्दाख में बांटने का पांच अगस्त को निर्णय लिया था। इसी निर्णय के अनुसार बृहस्पतिवार को जम्मू कश्मीर का दो केन्द्र शासित प्रदेशों में बंटवारा हो गया। चीन ने इससे पूर्व अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को हटाने और लद्दाख के केन्द्र शासित प्रदेश के रूप में गठन को लेकर आपत्ति जतायी थी और कहा था कि इसमें कुछ चीनी क्षेत्र भी शामिल हैं।चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गेंग शुआंग ने कहा कि चीन ने नाराजगी और इस पर कड़ा विरोध जताया है

चीन को बोलने का हक नहीं

भारत ने चीन की प्रतिक्रिया का तगड़ा जवाब दिया और कहा कि चीन ने भी इन प्रदेशों की ज़मीन के बड़े हिस्से पर कब्ज़ा कर रखा है और चीन समेत किसी भी देश को जम्मू कश्मीर के बारे में बोलने का कोई अधिकार नहीं है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने पत्रवार्ता में जम्मू कश्मीर एवं लद्दाख के बारे में चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता के बयान के बारे में सवालों के जवाब में कहा कि चीन इस मुद्दे पर भारत के सतत एवं स्पष्ट रुख से अच्छी तरह से परिचित है। जम्मू कश्मीर राज्य को जम्मू कश्मीर एवं लद्दाख के दो केन्द्र शासित प्रदेशों में बांटने का मामला पूरी तरह से भारत का आंतरिक मामला है। जम्मू कश्मीर एवं लद्दाख भारत का अभिन्न हिस्सा है। हमारी अपेक्षा है कि अन्य देश भारत की संप्रभुता एवं प्रादेशिक अखंडता का सम्मान करें। कुमार ने कहा कि जम्मू कश्मीर एवं लद्दाख के केन्द्र शासित प्रदेशों के बड़े भूभाग पर चीन का कब्ज़ा बना हुआ है। उसने 1963 के चीन पाकिस्तान सीमा समझौते के जरिये पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर के कुछ भूभाग को अवैध रूप से प्राप्त किया है।

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