अर्थव्यवस्था पर श्वेतपत्र लाने का प्रस्ताव नहीं : सीतारमण - Naya India
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अर्थव्यवस्था पर श्वेतपत्र लाने का प्रस्ताव नहीं : सीतारमण

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने आज कहा कि अर्थव्यवस्था पर श्वेतपत्र लाने का कोई प्रस्ताव नहीं है और देशभर के छोटे और सीमांत किसानों के लिए एक स्वैच्छिक और सहायक पेंशन योजना को पहले ही मंजूरी दे दी गई है, जो ग्रामीण क्षेत्र में आय सुरक्षा को बढ़ावा देगी। वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि छोटे दुकानदारों और खुदरा विक्रेताओं और स्वरोजगार करने वाले व्यक्तियों के लिए भी इसी तरह की पेंशन योजना को मंजूरी दी गई है। संरचनात्मक सुधारों का सकारात्मक प्रभाव वृद्धि पर पड़ने से संगठित व असंगठित क्षेत्र दोनों में अतिरिक्त रोजगार पैदा होते हैं।

लोकसभा में लिखित सवालों पर जवाब देते हुए वित्तमंत्री निर्मला ने कहा कि हाल के सालों में कई संरचनात्मक सुधार शुरू किए गए हैं। देश के वित्तीय प्रणाली की मजबूती व पारदर्शिता के लिए इनसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (आईबीसी) की शुरुआत एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि अर्थव्यवस्था से कालेधन को निकालने, कर आधार को बढ़ाने व समावेशी वृद्धि की औपचारिकता को बढ़ाने के लिए नोटबंदी एक जरूरी कदम था। देश की वृद्धि कई कारकों पर निर्भर है, जिसमें संरचनात्मक, बाह्य, वित्तीय एवं मौद्रिक कारकों पर निर्भर करती है। नोटबंदी के प्रभाव को जानने के लिए कोई प्रत्यक्ष या अगल से डाटा उपलब्ध नहीं है।

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मंत्री के जवाब के अनुसार, वस्तु एवं सेवा कर का क्रियान्वयन स्पष्ट तौर पर देश में व्यापार करने की सहजता में सुधार के महत्वपूर्ण उपायों में है। मेक-इन-इंडिया कार्यक्रम विश्व स्तर की वस्तुएं एंड सेवाओं के उत्पादन में देश की स्वदेशी क्षमता को बढ़ाने की दिशा में एक प्रमुख पहल है। सतत उदारीकरण से देश में विदेशी प्रत्यक्ष निवेश में रिकार्ड व अभूतपूर्व वृद्धि हुई है।

हाल ही में सरकार ने कॉरपोरेट टैक्स रेट को 30 फीसदी से कटौती कर 22 फीसदी कर दिया है, ऐसा देश में निवेश गतिविधि को बढ़ाने के लिए किया गया है। विशेष रूप से नई घरेलू मैन्यूफैक्चरिंग कंपनियों के लिए कॉरपोरेट टैक्स दर में 15 फीसदी की कटौती की गई है।

By हरिशंकर व्यास

भारत की हिंदी पत्रकारिता में मौलिक चिंतन, बेबाक-बेधड़क लेखन का इकलौता सशक्त नाम। मौलिक चिंतक-बेबाक लेखक-बहुप्रयोगी पत्रकार और संपादक। सन् 1977 से अब तक के पत्रकारीय सफर के सर्वाधिक अनुभवी और लगातार लिखने वाले संपादक।  ‘जनसत्ता’ में लेखन के साथ राजनीति की अंतरकथा, खुलासे वाले ‘गपशप’ कॉलम को 1983 में लिखना शुरू किया तो ‘जनसत्ता’, ‘पंजाब केसरी’, ‘द पॉयनियर’ आदि से ‘नया इंडिया’ में लगातार कोई चालीस साल से चला आ रहा कॉलम लेखन। नई सदी के पहले दशक में ईटीवी चैनल पर ‘सेंट्रल हॉल’ प्रोग्राम शुरू किया तो सप्ताह में पांच दिन के सिलसिले में कोई नौ साल चला! प्रोग्राम की लोकप्रियता-तटस्थ प्रतिष्ठा थी जो 2014 में चुनाव प्रचार के प्रारंभ में नरेंद्र मोदी का सर्वप्रथम इंटरव्यू सेंट्रल हॉल प्रोग्राम में था। आजाद भारत के 14 में से 11 प्रधानमंत्रियों की सरकारों को बारीकी-बेबाकी से कवर करते हुए हर सरकार के सच्चाई से खुलासे में हरिशंकर व्यास ने नियंताओं-सत्तावानों के इंटरव्यू, विश्लेषण और विचार लेखन के अलावा राष्ट्र, समाज, धर्म, आर्थिकी, यात्रा संस्मरण, कला, फिल्म, संगीत आदि पर जो लिखा है उनके संकलन में कई पुस्तकें जल्द प्रकाश्य। संवाद परिक्रमा फीचर एजेंसी, ‘जनसत्ता’, ‘कंप्यूटर संचार सूचना’, ‘राजनीति संवाद परिक्रमा’, ‘नया इंडिया’ समाचार पत्र-पत्रिकाओं में नींव से निर्माण में अहम भूमिका व लेखन-संपादन का चालीस साला कर्मयोग। इलेक्ट्रोनिक मीडिया में नब्बे के दशक की एटीएन, दूरदर्शन चैनलों पर ‘कारोबारनामा’, ढेरों डॉक्यूमेंटरी के बाद इंटरनेट पर हिंदी को स्थापित करने के लिए नब्बे के दशक में भारतीय भाषाओं के बहुभाषी ‘नेटजॉल.काम’ पोर्टल की परिकल्पना और लांच।

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