कश्मीर की नई डोमिसाइल नीति पर विवाद

श्रीनगर। देश भर में कोरोना वायरस की वजह से चल रहे लॉकडाउन के बीच केंद्र सरकार ने नई डोमिसाइल नीति जारी कर दी। नई डोमिसाइल नीति में कहा गया है कि जम्मू कश्मीर में पिछले 15 साल से रह रहे लोगों को ही डोमिसाइल मिलेगी यानी वहां का नागरिक माना जाएगा। साथ ही जिन बच्चे ने वहां के स्कूलों में सात साल पढ़ाई की है या दसवीं-बारहवीं कक्षा की परीक्षा पास की है उन्हें ही डोमिसाइल और सरकारी नौकरियां भी मिलेगी।

इस नीति के मुताबिक केंद्र सरकार के विभिन्न पदों पर काम करने वाले अधिकारी जो पिछले दस साल से सेवा में है उन्हें भी डोमिसाइल दिया जाएगा। राज्य में इस नई नीति का विरोध शुरू हो गया है। पूर्व मुख्यमंत्री और नेशनल कांफ्रेंस के नेता उमर अब्दुल्ला बुधवार को केंद्र की आलोचना की। उन्होंने कहा कि यह पहले से पीड़ित लोगों का अपमान है, क्योंकि वादे के मुताबिक कोई संरक्षण नहीं दिया जा रहा है।

उमर ने सिलसिलेवार ट्विट में कहा- जब हमारे सभी प्रयास और पूरा ध्यान कोविड-19 के संक्रमण को फैलने से रोकने पर होना चाहिए, तब सरकार जम्मू कश्मीर में नया डोमिसाइल कानून लेकर आई है। उमर ने कहा कि नया कानून इतना खोखला है कि दिल्ली के वरदहस्त प्राप्त नेता भी इसकी आलोचना करने के लिए मजबूर हैं। उनका इशारा जम्मू कश्मीर अपनी पार्टी के संस्थापक अल्ताफ बुखारी की ओर से इस कानून की आलोचना किए जाने की ओर था।

गौरतलब है कि सरकार ने बुधवार को एक गजट अधिसूचना जारी कर जम्मू कश्मीर के 138 कानूनों में कुछ संशोधन करने की घोषणा की। इनमें ग्रुप-चार तक की नौकरियां सिर्फ केंद्र शासित प्रदेश के मूल निवासियों के लिए संरक्षित रखना भी शामिल है। इस बीच जम्मू कश्मीर अपनी पार्टी, जेकेएपी के अध्यक्ष अल्ताफ बुखारी ने भी इसके लिए केंद्र सरकार की आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया है कि केंद्र शासित प्रदेश में डोमिसाइल कानून पर बुधवार को जारी केंद्र का आदेश राज्य के लोगों की आंखों में धूल झोंकने की कवायद के अलावा और कुछ नहीं है। बुखारी ने कहा कि यह संसद का बनाया गया कानून नहीं है, बल्कि सरकार की ओर से जारी आदेश है।

 

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