विपक्ष ने किया संसद का बायकॉट

नई दिल्ली। कृषि से जुड़े विवादित विधेयकों को ध्वनि मत से पास किए जाने और राज्यसभा के आठ सांसदों को निलंबित किए जाने के विरोध में विपक्षी पार्टियों ने संसद सत्र के बहिष्कार का ऐलान किया है। विपक्ष ने कहा है कि जब तक सरकार कृषि संबंधित विधेयक वापस नहीं लेती है और सांसदों का निलंबन खत्म नहीं किया जाता है, तब तक विपक्ष के सांसद सत्र में हिस्सा नहीं लेंगे। विपक्षी पार्टियों ने राज्यसभा के बहिष्कार का तो ऐलान पहले ही किया था, मंगलवार को लोकसभा की कार्यवाही में भी हिस्सा नहीं लेने का फैसला किया।

मंगलवार को मॉनसून सत्र का नौवां दिन था और सुबह में ही तय हो गया था कि सरकार और विपक्ष दोनों में से कोई पीछे नहीं हटेगा। सरकार ने मंगलवार को रूटीन अंदाज में कामकाज जारी रखी, जबकि विपक्ष ने दोनों सदनों का बहिष्कार किया। विपक्ष के सांसदों संसद की कार्य मंत्रणा समिति की बैठक में भी हिस्सा नहीं लिया। राज्यसभा में कांग्रेस के नेता गुलाम नबी आजाद ने कहा कि जब तक सांसदों का निलंबन वापस नहीं लिया जाता और कृषि बिल से जुड़ी चिताएं दूर नहीं होतीं, तब तक संसद सत्र का बायकॉट जारी रखेंगे।

विपक्ष की ओर से सरकार के सामने चार मांगें रखी गई हें। विपक्ष की कहना है कि सरकार ऐसा बिल लाए, जिससे कोई निजी कंपनी न्यूनतम समर्थन मूल्य, एमएसपी से कम कीमत पर किसानों की उपज नहीं खरीद सके। विपक्ष की दूसरी मांग स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों के आधार पर एमएसपी तय करने की है। विपक्ष ने यह भी कहा है कि एफसीआई जैसी सरकारी एजेंसियां किसानों की उपज एमएसपी से नीचे नहीं खरीदें। साथ ही चौथी मांग आठ  सांसदों का निलंबन वापस लेने की है।

विपक्ष के बहिष्कार को लेकर संसदीय कार्य मंत्री प्रहलाद जोशी ने लोकसभा में कहा- एक सदन में क्या होता है, इसकी चर्चा दूसरे सदन में कभी नहीं हो सकती। यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि अब इस पर चर्चा की जा रही है। उन्होंने राज्यसभा में हंगामा करने वाले सांसदों की आलोचना करते हुए कहा- उप सभापति की पिटाई करने की हद तक ये लोग गए, पर मैं इसकी चर्चा नहीं करना चाहता।

इससे पहले कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने कहा था- राज्यसभा और लोकसभा जुड़वा भाई जैसे हैं और अगर एक परेशान है तो दूसरा चिंतित होगा ही। हमारे मुद्दे कृषि बिल से जुड़े हैं। हम चाहते हैं कि इन्हें वापस लिया जाए। अगर तोमरजी इसे वापस ले लें तो हमें सत्र को आगे चलाने में कोई समस्या नहीं है।

सांसदों ने नहीं पी हरिवंश की चाय

राज्यसभा में विवादित तरीके से कृषि से संबंधित विधेयकों को पास कराने और विपक्ष के आठ सांसदों को निलंबित करने के मामले में मंगलवार को भी दिन भर राजनीति हुई। रविवार को संसद में हंगामा करने वाले आठ विपक्षी विधायकों को सोमवार को पूरे सत्र के लिए निलंबित कर दिया गया था। उसके बाद सांसदों ने संसद भवन परिसर में धरना दिया। पूरी रात आठ सांसद महात्मा गांधी की मूर्ति के सामने बैठे। मंगलवार की सुबह उप सभापति हरिवंश उनके लिए चाय लेकर पहुंचे थे, पर सांसदों ने उनकी चाय पीने से इनकार कर दिया।

रात भर संसद परिसर में धरने पर बैठे आठ सांसदों ने मंगलवार को सुबह 11 बजे अपना धरना खत्म किया। सांसदों ने बताया कि राज्यों की विधानसभाओं में पहले इस किस्म की घटना होती रही है पर संसद के इतिहास में पहली बार हुआ है कि सांसदों ने रात भर संसद भवन परिसर में धरना दिया। इन सांसदों को रविवार को राज्यसभा में उप सभापति हरिवंश के साथ खराब बरताव करने के आरोप में निलंबित किया गया है।

वहीं हरिवंश मंगलवार की सुबह चाय लेकर सांसदों के पास पहुंचे, हालांकि सांसदों ने उनकी चाय पीने से मना कर दिया। बाद में हरिवंश ने राष्ट्रपति को एक चिट्ठी लिखी और राज्यसभा के घटनाक्रम पर दुख जताया। उन्होंने सांसदों की सदबुद्धि के लिए एक दिन उपवास करने का ऐलान किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्विट कर हरिवंश की तारीफ करते हुए कहा- हरिवंश जी उन लोगों के लिए चाय लेकर पहुंचे, जिन्होंने कुछ दिन पहले उन पर हमला किया, उन्हें बेइज्जत किया। इससे पता चलता है कि हरिवंश जी कितने विनम्र और बड़े दिल वाले हैं। मैं देश की जनता के साथ उन्हें बधाई देता हूं।

प्रधानमंत्री मोदी इन दिनों बिहार चुनाव में इस्तेमाल होने वाले किसी मसले को यूं ही नहीं जाने देते। सो, उन्होंने दूसरे ट्विट में कहा- बिहार की महान धरती सदियों से हमें लोकतंत्र के मूल्यों की सीख दे रही है। इस खूबसूरत परंपरा को आगे बढ़ाते हुए बिहार के सांसद और राज्यसभा के उप सभापति हरिवंश जी हमें प्रेरणा दे रहे हैं। आज सुबह उन्होंने जो किया, उससे लोकतंत्र से प्यार करने वाले हर आदमी को गर्व होगा।

सभापति ने विपक्ष से की अपील

राज्यसभा के सभापति एम वेंकैया नायडू ने विपक्ष से संसद की कार्यवाही में हिस्सा लेने की अपील की है। उन्होंने विपक्ष के संसद सत्र का बायकॉट करने के फैसले पर मंगलवार को कहा- बायकॉट के फैसले पर फिर से विचार करें और सदन में चर्चा जारी रखें। उन्होंने कहा- सांसदों के व्यवहार की वजह से उनके खिलाफ कार्रवाई की गई। हम किसी सदस्य के खिलाफ नहीं हैं। सांसदों के निलंबन से मैं भी खुश नहीं हूं।

दूसरी ओर केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि निलंबित सांसद अपने व्यवहार पर माफी मांग लें तो निलंबन वापस लेने पर विचार किया जाएगा। उन्होंने कहा- हमें उम्मीद है कि सदन में इस तरह के हंगामे का कांग्रेस भी विरोध करेगी। गौरतलब है कि उप सभापति से असंसदीय व्यवहार करने के आरोप में सांसदों को निलंबित किया गया है। इन सांसदों ने रविवार को कृषि बिलों के विरोध में राज्यसभा में हंगामा किया था। सदन की रूलबुक फाड़ दी और माइक तोड़ने की कोशिश भी की थी।

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