ओटीटी प्लेटफॉर्म्स पर सुप्रीम कोर्ट सख्त

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नई दिल्ली। कई ओटोटी प्लेटफॉर्म्स पर अश्लील सामग्री दिखाए जाने की टिप्पणी के एक दिन बाद सुप्रीम कोर्ट की सख्ती कायम रही है। सर्वोच्च अदालत ने ओवर द टॉप यानी ओटीटी प्लेटफॉर्म्स पर दिखाई जाने वाली सामग्री को नियंत्रित करने के लिए और सख्त कानून की जरूरत बताई है। इस पर नियंत्रण के लिए बनाए गए केंद्र सरकार के गाइडलाइंस को कमजोर बताते हुए अदालत ने कहा है इसमें मुकदमा चलाने का प्रावधान नहीं है। अदालत ने साथ ही यह भी कहा है कि गाइडलाइंस की जगह सरकार कानून बनाए।

सुप्रीम कोर्ट ने ओटीटी प्लेटफॉर्म्स के नियंत्रण के लिए केंद्र सरकार की नई गाइडलाइंस पर भी नाराजगी जताते शुक्रवार को कहा कि इन गाइडलाइंस में कोई दम नहीं है, क्योंकि इनमें मुकदमा चलाने का प्रावधान नहीं है। साथ ही अदालत ने कहा कि ओटीटी प्लेटफॉर्म्स को नियंत्रित करने के लिए गाइडलाइन की बजाय कानून बनाना चाहिए। इस मामले में सरकार की तरफ से पेश सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि सरकार सही कदम उठाने पर विचार करेगी। साथ ही कहा कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर किसी भी रेगुलेशन के बारे में कोर्ट को बताया जाएगा।

गौरतलब है कि अमेजॉन प्राइम वीडियो पर दिखाए जा रहे वेब सीरिज तांडव के मामले में सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को कहा था कि ओटीटी प्लेटफॉर्म्स पर जो भी कंटेंट दिखाया जाता है, उसकी स्क्रीनिंग होनी चाहिए, क्योंकि कुछ प्लेटफॉर्म्स पर तो पोर्नोग्राफी भी दिखाई जा रही है। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से सोशल मीडिया और ऑनलाइन स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म्स को नियंत्रित करने के लिए बनी नई गाइडलाइन सौंपने को भी कहा था।

इस मामले में शुक्रवार को आगे सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने अमेजॉन प्राइम वीडियो की भारत की प्रमुख अपर्णा पुरोहित को गिरफ्तारी से सुरक्षा दी, यानी पुलिस उन्हें गिरफ्तार नहीं कर सकती। इसके साथ ही अदालत ने अपर्णा से कहा है कि वे जांच में सहयोग करें। तांडव में विवादित दृश्यों को लेकर लखनऊ में दर्ज एफआईआर में अपर्णा का भी नाम है। उन्होंने इलाहाबाद हाई कोर्ट में अग्रिम जमानत अर्जी दी थी, जिसे हाई कोर्ट ने खारिज कर दिया था। इसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। अदालत ने शुक्रवार को अपर्णा को गिरफ्तारी से सुरक्षा देते हुए उनकी याचिका पर उत्तर प्रदेश सरकार से जवाब मांगा।

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साभार - ऐसे भी जानें सत्य

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