पीएम केयर्स की जांच नहीं कर पाएगी पीएसी

नई दिल्ली। कोरोना वायरस के संक्रमितों की मदद के लिए बनाए गए पीएम केयर्स फंड के बारे में सूचना के अधिकार कानून, आरटीआई के तहत जानकारी देने स इनकार के बाद अब खबर है कि संसद की लोक लेखा समिति, पीएसी भी इसकी जांच नहीं कर पाएगी। पीएसी की बैठक में भाजपा और उसकी सहयोगी पार्टियों के सांसदों ने पीएम केयर्स की जांच के प्रस्ताव को रूकवा दिया। सत्ता पक्ष के सदस्यों का बहुमत होने की वजह से जांच का प्रस्ताव स्वीकार नहीं किया जा सका।

लोक लेखा समिति के अध्यक्ष अधीर रंजन चौधरी ने समिति के सदस्यों से देश के बारे में सोचने और अपनी अंतरात्मा से काम करने और इस महत्वपूर्ण विषय पर आम सहमति बनाने की अपील की थी। गौरतलब है कि चौधरी लोकसभा में कांग्रेस के नेता हैं। बताया जा रहा है कि पीएसी में बैठक में शामिल भाजपा सदस्यों ने कोरोना संकट के सरकारी प्रबंधन की जांच अधीर रंजन चौधरी के प्रस्ताव को रोक दिया। बैठक में पीएसी में शामिल भाजपा के सभी सदस्य शामिल हुए थे।

बताया जा रहा है कि बीजू जनता दल के नेता भतृहरि मेहताब ने भी भाजपा का समर्थन किया। कांग्रेस के साथ साथ डीएमके और ने जांच का समर्थन किया था। विपक्षी नेताओं का दावा है कि भाजपा कोरोना महामारी और उससे निपटने के लिए उठाए गए कदमों की जांच से इसलिए बचना चाहती है कि इससे पीएम केयर्स फंड पर करीब नजर रखी जा सकती है। ध्यान रहे पीएम केयर्स फंड सीएजी के अधीन नहीं आता है।

बताया जा रहा है कि संसदीय समिति की बैठक में भाजपा के नेता भूपेंद्र यादव ने पीएम केयर्स फंड की जांच के प्रस्ताव को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि पीएम केयर्स की फंडिंग संसद से मंजूर नहीं है और इस वजह से लोक लेखा समिति इस मामले की जांच नहीं कर सकती है। इस फैसले के बाद लोक लेखा समिति भारत में हुए लॉकडाउन और कोरोना वायरस से निपटने के लिए सरकार की ओर से उठाए गए कदमों की जांच पड़ताल नहीं कर पाएगी।

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