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नए संसद भवन का हुआ भूमिपूजन

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को संसद की नई इमारत के निर्माण के लिए भूमिपूजन किया। गुरुवार को दिन में एक बजे पारंपरिक मंत्रोच्चार और पूजा पाठ के साथ उन्होंने भूमिपूजन किया। इस मौके पर सर्वधर्म प्रार्थना भी हुई। नए संसद भवन का निर्माण करीब दो साल में पूरा होगा और 2022 में आजादी के 75 साल पूरे होने के मौके पर संसद का शीतकालीन सत्र नए भवन में आयोजित होगा। नए संसद भवन में दोनों सदनों में ज्यादा सांसदों के बैठने की व्यवस्था होगी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस मौके पर कहा कि पुराने संसद भवन ने आजादी के बाद के भारत की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए काम किया और नया संसद भवन 21वीं सदी की आकांक्षाओं को पूरा करने का माध्यम बनेगा। उन्होंने कहा कि इसमें सांसदों की कार्यक्षमता बढ़ेगी और वर्क कल्चर में आधुनिक तौर-तरीके शामिल होंगे। उन्होंने इस मौके पर भारतीय लोकतंत्र का जम कर गुणगान भी किया।

प्रधानमंत्री ने कहा- आज 130 करोड़ से ज्यादा भारतीयों के लिए बड़े सौभाग्य और गर्व का दिन है, जब हम इस ऐतिहासिक पल के साक्षी बन रहे हैं। भारतीयों द्वारा, भारतीयता के विचार से ओतप्रोत भारत के संसद भवन के निर्माण का शुभारंभ लोकतांत्रिक परंपराओं के अहम पड़ावों में से एक है। उन्होंने कहा कि भारत में लोकतंत्र जीवन का मंत्र भी है और व्यवस्था का तंत्र भी है। प्रधानमंत्री ने कहा- हम अपने लोकतंत्र का गुणगान करेंगे तो वो दिन दूर नहीं, जब दुनिया कहेगी कि इंडिया इज मदर ऑफ डेमोक्रेसी।

प्रधानमंत्री ने भारतीय लोकतंत्र का गुणगान करते हुए कहा- दुनिया के अनेक देशों में जहां लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को लेकर अलग स्थिति बन रही है, वहीं भारत में लोकतंत्र नित्य नूतन हो रहा है। हाल में हमने देखा है कि कई लोकतांत्रिक देशों में वोटर टर्नआउट घट रहा है। इसके उलट भारत में हर चुनाव के साथ वोटर टर्नआउट बढ़ता हुआ देख रहे हैं। इसमें भी महिलाओं और युवाओं की भागीदारी निरंतर बढ़ती जा रही है। अलग विचार, दृष्टिकोण ये सब बातें एक वाइब्रेंट डेमोक्रेसी को मजबूत करते हैं।

मौजूदा संसद भवन को लेकर उन्होंने कहा- हमारे वर्तमान संसद भवन ने आजादी के आंदोलन के बाद स्वतंत्र भारत को गढ़ने में अहम भूमिका निभाई है। आजाद भारत की पहली सरकार का गठन भी यहीं हुआ और पहली संसद भी यहीं बैठी। इसी भवन में संविधान की रचना हुई, लोकतंत्र की पुनर्स्थापना हुई। संसद की मौजूदा इमारत स्वतंत्र भारत के हर उतार-चढ़ाव, चुनौतियों, आशाओं, उम्मीदों का प्रतीक रही है। इस भवन में बना प्रत्येक कानून, संसद में कही गई गहरी बातें हमारे लोकतंत्र की धरोहर हैं।

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