आंदोलनकारियों का उड़ाया मजाक

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नई दिल्ली। केंद्र सरकार के बनाए तीन केंद्रीय कानूनों के विरोध में पिछले 75 दिन से चल रहे आंदोलन में शामिल लोगों का मजाक उड़ाते हुए कहा कि ये आंदोलनजीवी लोग हैं, जो बिना आंदोलन के जीवित नहीं रह सकते। उन्होंने अपने चिर-परिचित अंदाज में किसान आंदोलन को अलग कर दिया और उसमें आंदोलन का नेतृत्व कर रहे लोगों को अलग कर दिया और इसके बाद नेतृत्व कर रहे लोगों पर तंज करते हुए उन्होंने आंदोलनजीवी कहा और यह भी कहा कि परजीवी लोग हैं।

प्रधानमंत्री ने सोमवार को राज्यसभा में भाषण में कहा- हम लोग कुछ शब्दों से परिचित हैं- श्रमजीवी, बुद्धिजीवी। मैं देख रहा हूं कि पिछले कुछ समय से इस देश में नई जमात पैदा हुई है। एक नई बिरादरी सामने आई है- आंदोलनजीवी। आप देखेंगे कि आंदोलन चाहे वकीलों का हो, स्टूडेंट्स का हो, मजदूरों का हो, हर आंदोलन में ये जमात नजर आएगी। ये आंदोलन के बिना जी नहीं सकते। हमें इन्हें पहचानना होगा।

मोदी ने आगे कहा- ऐसे आंदोलनजीवी सब जगह पहुंच कर आइडियोलॉजिकल स्टैंड ले लेते हैं। नए-नए तरीके बताते हैं। ये अपना आंदोलन खड़ा नहीं कर पाते। किसी का आंदोलन चल रहा तो वहां जाकर बैठ जाते हैं। ये सारे आंदोलनजीवी परजीवी होते हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने तंज की इसी शैली में भाषण जारी रखते हुए कहा- देश प्रगति कर रहा है और हम फॉरेन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट की बात कर रहे हैं, लेकिन बाहर से एक नया एफडीआई नजर आ रहा है। ये नया एफडीआई है- फॉरेन डिस्ट्रक्टिव आइडियोलॉजी। इस एफडीआई से देश को बचाने के लिए हमें और जागरूक रहने की जरूरत है।

प्रधानमंत्री का स्पष्ट इशारा पर्यावरण कार्यकर्ता ग्रेटा थनबर्ग, अमेरिकी पॉप सिंगर रिहाना और दूसरी विदेशी हस्तियों पर था, जिन्होंने हाल ही में अपनी सोशल मीडिया पोस्ट्स के जरिए किसान आंदोलन का समर्थन किया है। प्रधानमंत्री ने विपक्ष पर भी निशाना साधा और विपक्षी पार्टियों की तुलना शादियों में नाराज होने वाली फूफी से की और कहा- परिवार में शादी होती है तो भी फूफी नाराज होती है कि हमें कहां बुलाया था। इतना बड़ा अपना परिवार है तो ऐसा होता ही रहता है। एक तरह से प्रधानमंत्री ने विपक्षी पार्टियों से बात नहीं करने के स्टैंड को जायज ठहराया।

प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में सिखों की तारीफ भी की। उन्होंने कहा- कुछ लोग हमारे पंजाब के सिख भाइयों के दिमाग में कुछ गलत चीजें भरने में लगे हैं। ये देश हर सिख के लिए गर्व करता है। देश के लिए क्या कुछ नहीं किया इन्होंने। गुरुओं की महान परंपरा रही है। कुछ लोग सिखों को गुमराह करने की कोशिश करते हैं। इससे देश का भला नहीं होगा।

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साभार - ऐसे भी जानें सत्य

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