देश में पहली बार 21 दिन का लॉकडाउन

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कोरोना वायरस से बचने के लिए मंगलवार 24 मार्च 2020 की रात 12 बजे से 21 दिन तक पूरे देश में लॉकडाउन की घोषणा कर दी है। यह एक अद्भुत और आश्चर्यजनक घोषणा है। भारतीय जनसंख्या का स्वरूप क्या है और रोज कमाकर खाने वालों का जीविकोपार्जन 21 दिन तक कैसे होगा, यह विचार इसके पीछे नहीं है।

मोदी ने 22 मार्च को जनता कर्फ्यू की घोषणा की थी, जिसका लोगों ने समर्थन किया और उनकी अपील पर शाम पांच बजे ताली, थाली, घंटी आदि बजाई। इसके बाद विभिन्न राज्य सरकारों ने लॉकडाउन की घोषणाएं की। उसको भी अच्छा समर्थन मिला। इस तरह लाकडॉउन की छिटपुट घोषणाओं को विराम देते हुए प्रधानमंत्री ने सीधे 21 दिन का लॉकडाउन कर दिया है। इस दौरान पुलिस कितने लोगों को पीटेगी, जीने के लिए जरूरी सामान कैसे जुटाया जाएगा, समझ से परे है।

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गौरतलब है कि जब से यह सृष्टि है, तब से अब तक क्या कभी ऐसा हुआ है कि मनुष्य ने कई दिनों तक स्वयं को घरों में बंद रखा हो? अब ऐसा होगा। मनुष्यों के साथ आश्चर्यजनक प्रयोग हो रहे हैं। नया प्रयोग बीमारी के खिलाफ युद्ध के नाम पर है। युद्ध जीतने में सभी को योगदान देना है। पहले जो युद्ध हुआ करते थे, उनमें लोगों को घरों से बाहर निकलकर लड़ना पड़ता था। सरकार ने बीमारी के खिलाफ युद्ध लोगों को उनके घरों के भीतर रखकर लड़ने की तरकीब निकाली है। हवा में मनुष्य नहीं रहेंगे, सिर्फ वायरस रहेगा। प्रधानमंत्री की घोषणा से मनुष्य कितना स्वाधीन है और कितना पराधीन, यह भी स्पष्ट हो रहा है। क्या बीमारी है, क्या असर है, क्या परिणाम हैं, इसको लेकर कुछ पश्चिमी देशों के अनुभव हैं और भारत में एक झलक है। इस बीमारी से लड़ने में भारत भी विश्व के अन्य देशों के साथ कदमताल करने का प्रयास कर रहा है। भारत एक विकासशील देश है और गरीबों की संख्या यहां बहुत ज्यादा है।

यहां विकसित देशों की बराबरी नहीं की जा सकता। यहां तो कई लोगों के पास अपने घर ही नहीं है। वे जैसे-तैसे अपना गुजारा करते हैं। कई लोग खुले में या फुटपाथ पर रहते हैं। वे कहां बंद रहेंगे? और एक स्थान पर लंबे समय तक बंद रहना मनुष्य का स्वभाव भी नहीं है। सक्रियता उसका धर्म है। ऐसे में भारत जैसे देश में कई दिनों तक घर में बंद रहने की मजबूरी क्या किसी बीमारी से कम है? जिन लोगों को स्वास्थ्य ठीक रखने के लिए घूमना-फिरना, टहलना जरूरी है, वे क्या करेंगे? एक नई आसन्न बीमारी से बचने के लिए जो कदम उठाए जा रहे हैं, नागरिकों को अनुशासन और संयम से रहने की सीख दी जा रही है, उससे क्या गारंटी है कि कोरोना पूरी तरह खत्म हो जाएगा और उसके बाद इस तरह का कोई नया वायरस नहीं आएगा? क्या लोगों को घरों में बंद रखने से ही बीमारी से बचाव हो सकता है? इस तरह कितने लोग जीने लायक रहेंगे?

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