थक गए हैं आंदोलनकारी

दिल्ली के कई लोग शाहीन बाग में आंदोलन करते-करते लोग थक गए हैं। दो महीने हो गए। अब तक किसी बड़े नेता ने भाव नहीं दिया। अखबारों के जरिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह को सलाह दी गई थी कि वे शाहीन बाग जाकर आंदोलनकारियों से मिलें और उनकी शंकाओं का समाधान करें। लेकिन उन्हें आंदोलनकारियों से मिलना ही नहीं था।

इससे वोटों के ध्रुवीकरण में समस्या पैदा हो सकती थी। और, जो लोग खुद ही बहुत बोलते रहते हैं, वे दूसरों की बातें सुनने में रुचि नहीं लेते। दिल्ली विधानसभा चुनाव के प्रचार में भाजपा नेताओं को बहुत बोलना पड़ रहा था।
तमाम भाजपा नेताओं की ड्यूटी दिल्ली में लगी हुई थी। किसी को भी आंदोलनकारियों से बात करने में जरा भी रुचि नहीं थी। उलटे कई भाजपा नेताओं को सुविधा थी। वे शाहीन बाग के नाम पर सांप्रदायिकता आधारित प्रचार करते रहे। अब चुनाव हो गए। भाजपा हार गई। आम आदमी पार्टी जीत गई। आंदोलनकारियों ने सोचा कि अब गृहमंत्री से मिल सकते हैं। गृहमंत्री अमित शाह फिर भी नहीं मिले। आंदोलनकारियों के जुलूस को पुलिस ने रास्ते में बैरिकेड्स लगाकर रोक दिया।

इससे पहले आंदोलनकारियों ने पुलिस से जुलूस निकालने की इजाजत मांगी थी। पुलिस ने सूची भी मांगी थी कि कौन-कौन मिलना चाहते हैं, लेकिन मुलाकात नहीं हो सकी। आंदोलनकारियों से पुलिस अधिकारियों ने क्या कहा, यह स्पष्ट नहीं है, लेकिन कुछ कहा अवश्य है। यह आंदोलकारियों की भाव भंगिमा से स्पष्ट हो रहा था। पुलिस का कहना है कि गृहमंत्री की तरफ से आंदोलनकारियों को मिलने की अनुमति नहीं दी गई थी। बहरहाल इस पूरे घटनाक्रम से यह स्पष्ट है कि फिलहाल आंदोलन जारी रहेगा। उसे समाप्त करवाने में सरकार की कोई रुचि नहीं है। वह आंदोलन के अपने आप विसर्जित होने का इंतजार कर रही है।

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