भागवत ने दी ‘राष्ट्रवाद’ से बचने की सलाह

रांची में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत ने एक बार फिर घोषणा की है कि आरएसएस हिंदुत्व के मुद्दे पर ही आगे बढ़ेगा। भारत ही दुनिया की अगुवाई कर सकता है। इसके साथ ही उन्होंने भाजपा नेताओं को आगाह किया कि वे राष्ट्रवाद शब्द के इस्तेमाल से बचें। उन्होंने कहा, नेशनलिज्म शब्द का उपयोग मत कीजिए। नेशन करेंगे चलेगा, नेशनल कहेंगे चलेगा, नेशनलिटी कहेंगे चलेगा, नेशनलिज्म मत करो, नेशनलिज्म का मतलब है हिटलर, नाजीवाद।

वह मुरादाबादी में आयोजित मुखर्जी विश्वविद्यालय में आरएसएस के एक कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। गौरतलब है कि इन दिनों तमाम भाजपा नेता भाषणों में राष्ट्रवाद शब्द का उपयोग कर रहे हैं। भागवत का कहना है कि नेशनलिज्म कहते ही हिटलर और मुसोलिनी की याद आती है। इससे पहले पिछले साल अक्टूबर में भी भागवत ने नेशनलिज्म को हिटलर के साथ जोड़ा था। पिछले हफ्ते आरएसएस संयुक्त कार्यवाह मनमोहन वैद्य भी कह चुके हैं कि नेशनलिज्म भारतीय शब्द नहीं है। यहां साझा संस्कृति है। नेशनलिज्म शब्द पश्चिमी देशों से आया है। भारत का राष्ट्रीय शब्द पश्चिम के राष्ट्रवाद से अलग है।

राष्ट्रवाद शब्द से हिटलर और मुसोलिनी की विचारधारा की झलक मिलती है। लोग इसे फासिज्म समझते हैं। यह संघ की विचारधारा नहीं है। भागवत और वैद्य के बयान के विपरीत भाजपा नेता अपने भाषणों में देश में राष्ट्रवाद को बचाने की अपील करने वाले भाषण देते रहते हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी एक बार कह चुके हैं कि राष्ट्रवाद भाजपा की पहचान है। पिछले लोकसभा चुनाव में तत्कालीन भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने भी कहा था इतना बड़ा देश (भारत जैसा) राष्ट्रवाद के बगैर नहीं रह सकता।

पार्टी के अन्य नेताओं ने भी कई बार देशभक्ति और राष्ट्रवाद को बढ़ावा देने की अपील कर चुके हैं। देशभक्ति और राष्ट्रवाद शब्द के निरंतर इस्तेमाल से देश की जनता को कोई गलतफहमी न हो जाए, इसके लिए आरएसएस के नेता अब राष्ट्रवाद शब्द के इस्तेमाल से बचने की अपील करने लगे हैं। क्या भाजपा के नेता आरएसएस नेताओं की बात मानेंगे? भाजपा आरएसएस की विचारधारा पर आधारित राजनीतिक पार्टी है।

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