मप्र कांग्रेस के दिग्गजों के सामने बच्चे हैं ज्योतिरादित्य

ज्योदिरादित्य सिंधिया के पाला बदलने के बाद कई खबरें फिजां में तैर रही हैं। कोई कह रहा है कि राहुल गांधी मिलने का समय नहीं देते थे, जबकि हकीकत यह है कि ज्योतिरादित्य के सोनिया और राहुल से इतने घनिष्ठ संबंध रहे हैं कि वे कभी भी उनके घर जा सकते थे।

सोनिया गांधी ने उन्हें मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पद संभालने के लिए भी कहा था, लेकिन उन्होंने रुचि नहीं दिखाई। राहुल गांधी उनको लंच पर साथ ले गए थे और राज्यसभा सदस्य बनने का प्रस्ताव दिया, उनसे लंबी बातचीत की थी।

मां-बेटे ने सपने में भी नहीं सोचा था कि ज्योतिरादित्य के मन में क्या पक रहा है? ऐसा लगता है कि ज्योतिरादित्य को मध्य प्रदेश में ही राजनीति करनी है और दिग्विजय सिंह और कमलनाथ की जुगलबंदी उन्हें रुकावट प्रतीत होती थी। जब मध्य प्रदेश में शिवराज सिंह भाजपा की सरकार चला रहे थे, तब ज्योतिरादित्य ने भाजपा में जाने के बारे में कभी नहीं सोचा।

मामला व्यक्तिगत प्रतिष्ठा से जुड़ा हुआ हो सकता है। दिग्विजय सिंह दो बार मुख्यमंत्री रह चुके हैं और दस साल राजनीतिक वनवास काट चुके हैं तो जाहिर है कि ज्योतिरादित्य राजनीति में उनके सामने बच्चे हैं। कमलनाथ भी पार्टी के बहुत पुराने सिपाही हैं। ये दोनों जब कांग्रेस की राजनीति में सफल पारियां खेल रहे थे, तब ज्योतिरादित्य स्कूल-कॉलेज में पढ़ रहे होंगे।

अब वह सिर्फ पूर्व राजघराने के महाराजा होने के नाते महत्व चाहते हैं और सत्ता पर नियंत्रण चाहते हैं, जो कि संभव नहीं है। यह देखना मनोरंजक होगा कि भाजपा उनके साथ क्या करती है।

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