मूडी से सरकार का मूड ऑफ नहीं होगा

मूडी की रिपोर्ट कुछ भी रहे, सरकार का मूड ऑफ नहीं होगा। विकास दर भले ही घट रही हो, उत्साह दर बढ़ रही है। सीएए और एनसीआर ने आग में घासलेट डाला हुआ है। अर्थ व्यवस्था झुलस रही है। अखबारों में खबर छपी कि मूडी की रिपोर्ट से केंद्र सरकार को झटका लगा। अंतरराष्ट्रीय रेटिंग एजेंसी मूडी ने वर्ष 2020 में आर्थिक विकास दर का अनुमान 6.6 से घटाकर 5.4 फीसदी कर दिया है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भगवान महादेव के नाम पर जो बातें कहीं, उनसे तो यही संदेश मिलता है कि देश की जनता को रेटिंग-फेटिंग एजेंसियों के अनुमान की चिंता नहीं करना चाहिए।

सरकार को देश में एक बहुत बड़ा काम करना है। कई लोग विरोध कर रहे हैं, आंदोलन हो रहे हैं, इसके बावजूद करना है। इसलिए अर्थ व्यवस्था इस समय प्राथमिकताओं में नहीं है। एक युद्ध जैसी स्थिति बन रही है। आर या पार। यही मौका है। मूडी के मुताबिक भारत की अर्थ व्यवस्था में दो साल में सुस्ती आई है। लेकिन दिल्ली विधानसभा के लिए जैसा चुनाव प्रचार हुआ, उससे तो नहीं लगता। पूरे उत्साह से चुनाव प्रचार हुआ। सीएए और एनसीआर के खिलाफ आंदोलन भी उत्साह से चल रहे हैं। फिर काय की सुस्ती? अर्थ व्यवस्था के आंकड़े अलग होते हैं। सुस्ती का वातावरण अलग होता है। सुस्ती बिलकुल नहीं है। मोदी सरकार अपने एजेंडे पर पूरी तरह सक्रिय है।

देश को नए रूप में, नए रंग-ढंग में ढालना है। अर्थ व्यवस्था तो बिगड़ती-सुधरती रहती है। रेटिंग एजेंसियां अपना काम करती रहती हैं। लेकिन असली काम तो अब करना है, जो अर्थ व्यवस्था की चिंता करेंगे तो मुश्किल हो जाएगा। इसके लिए ज्यादा से ज्यादा लोगों का अशिक्षित और गरीब बने रहना भी जरूरी है, क्योंकि बहुमत से ही देश की सरकार बनती है। गरीबों की विशाल जनसंख्या को सरकार के समर्थन में बनाए रखना मुश्किल काम नहीं है। बस एक बार सत्ता पर नियंत्रण हो जाना चाहिए। उसके बाद मंजूरे खुदा नहीं… मंजूरे सरकार ही होता है।

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