सजा एक, बचने के तरीके अनेक

चाल लोगों ने एक युवती के साथ बस में वीभत्स तरीके से रेप किया। घटना के विरोध में पूरा देश उठ खड़ा हुआ। चारों आरोपी पकड़ लिए गए। अदालत से सजा हो गई। अब उनको फांसी पर चढ़ाना है। दो बार फांसी की तारीख टल चुकी है। तीसरी तारीख तीन मार्च की है। तीन मार्च को सुबह छह बजे चारों को फांसी पर लटकाने के लिए डेथ वारंट जारी हो चुका है।

दिल्ली में निर्भया के साथ 16 दिसंबर 2012 की रात रेप हुआ था। देशव्यापी आंदोलन के बाद सरकार ने कुछ सख्त नियम भी बना दिए। एक कोष बना दिया, लेकिन आरोपियों को सजा अब सात-आठ साल बाद हो रही है। उसमें भी अड़ंगे लग रहे हैं। पहले 22 जनवरी 2020 को फांसी देना था। इसके बाद एक फरवरी की तारीख तय हुई। वह भी टल गई। अब तीसरी बार तारीख तय की गई है। आरोपियों को मरने से बचाने के लिए उनके वकील तरह-तरह के दावपेच चल रहे हैं। कोई बीमारी का बहाना बना रहा है, कोई कुछ और। एक आरोपी राष्ट्रपति को दया याचिका सौंपने की तैयारी में है।

चारों आरोपियों को एक ही दिन फांसी दी जानी है। उनके वकील अलग-अलग हैं। केस भी अलग-अलग हैं। कभी एक का वकील फांसी टलवा देता है तो कभी दूसरे का वकील। एक वकील का दावा है कि वह तीन तारीख को फांसी नहीं होने देगा। कानून ऐसा है कि उसमें सजा देने का रास्ता सिर्फ एक है, लेकिन सजा से बचने के कई तरीके हैं। निर्भया मामले में यह साफ दिख रहा है। इसलिए यह अभी तय नहीं है कि तीन मार्च को इन आरोपियों को फांसी हो ही जाएगी। तारीख एक बार फिर टल सकती है।

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