मध्य प्रदेश में नई सरकार के सामने दिक्कतें

मध्य प्रदेश में कांग्रेस की सरकार को गिराकर भाजपा ने सरकार बना ली है, लेकिन मंत्रिमंडल के गठन में समस्याएं पैदा हो गई हैं। ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ 22 विधायक भाजपा में शामिल हुए हैं। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान समझ नहीं पा रहे हैं कि किसे मंत्री बनाएं और किसे नहीं। लॉकडाउन खत्म होने के बाद मंत्रिमंडल का गठन होगा। विधानसभा में कुल 230 विधायक हैं। इस हिसाब से 35 विधायकों को मंत्री बनाया जा सकता है। सूत्रों के मुताबिक शुरू में करीब 28 विधायक मंत्री पद की शपथ लेंगे, जिनमें से 10 सिंधिया समर्थक विधायक शामिल हो सकते हैं। भाजपा के पुराने दिग्गज विधायक जोड़-तोड़ में लग गए हैं।

 नई सरकार में सामाजिक समीकरण और क्षेत्रीय संतुलन साधने की कवायद भी होगी।  क्षत्रिय, ब्राह्मण, पिछड़े, अनुसूचित जाति और आदिवासी समाज को प्रतिनिधित्व दिए जाने की संभावना है, लेकिन भौगोलिक संतुलन चिंता का विषय बन रहा है। जातिगत संतुलन में भी दिक्कतें आ रही हैं। राजपूत वर्ग के दावेदारों की संख्या बढ़ गई है। ब्राह्मण वर्ग का भी यही हाल है। पहली खेप में भाजपा अपने कोटे के अधिकतम 18 मंत्री बनाना चाहती है। जाहिर है मंत्री बनने की कतार में लगे विधायकों में से कई निराश होंगे, जिससे असंतोष फैलेगा। बहरहाल शिवराज सिंह के लिए राह आसान नहीं है। वह पहले की तरह कुशलतापूर्वक सरकार चला पाएंगे, इसमें संदेह है।

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