जिद्दी सरकार के तेवर नहीं बदलेंगे

शाहीन बाग पर पड़ाव कुछ दिन जारी रहेगा, क्योंकि आंदोलनकारी गृहमंत्री अमित शाह से मिलने का इरादा लेकर जुलूस के रूप में निकले थे। पुलिस ने उन्हें रोक दिया। गृहमंत्री के दफ्तर से उन्हें अमित शाह से मिलने की अनुमति नहीं मिली। ये आंदोलनकारी नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनसीआर) लागू करने का विरोध कर रहे हैं। सरकार नहीं मान रही है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने एलान कर दिया है कि कानून लागू होकर रहेगा।

सुनने में आया है कि मोदी और शाह गुजरात के अनुभवों से प्रेरणा ले रहे हैं। गुजरात में दंगों के बाद उन्होंने अबाध रूप से सरकार चलाई थी। दंगे सांप्रदायिक उन्माद में हुए थे। अपने देश में किस तरह का सांप्रदायिक उन्माद है, सभी जानते हैं, लिखने की जरूरत नहीं। शाहीन बाग जैसे आंदोलनों को टिकाऊ होते देख उन्होंने मान लिया है कि गुजरात का फार्मूला पूरे देश में लागू हो सकता है। शाहीन बाग जैसे आंदोलन तमाम शहरों में होने की खबर है। कभी भी कुछ भी हो सकता है।

सरकार अपने हिसाब से घटनाओं को मोड़ दे देगी। बहरहाल सीएए और एनसीआर का विरोध करने वालों को सहन करने के मूड में सरकार बिलकुल नहीं दिख रही है। विचार-विमर्श, बातचीत के रास्ते बंद हैं। सरकार प्रमुख सिर्फ भाषण देते हैं और आदेश जारी करते हैं। जनता से वन टू वन बातचीत के लिए उनके पास समय नहीं है। दिल्ली में फिर से अरविंद केजरीवाल की प्रचंड जीत जिद्दी भाजपा सरकार के तेवर बदलने वाले नहीं हैं।

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