मप्र में उठापटक जारी, नई सरकार बनना इतना आसान नहीं

मध्य प्रदेश की राजनीति का ऊंट किस करवट बैठेगा, कह नहीं सकते। विधायकों की बाड़ाबंदी जबर्दस्त तरीके से हो रही है। कांग्रेस के 87 विधायकों को राजस्थान में जयपुर के पास दो रिसोर्टों में ठहराया गया है।

ज्योतिरादित्य सिंधिया के समर्थक विधायक बेंगलुरु के एंबेसी बौलीवोर्ड रिसोर्ट में ठहरे हुए हैं। कमलनाथ सरकार के मंत्री जीतू पटवारी और लखन सिंह विधायक इन विधायकों से मिलने बेंगलुरु पहुंचे थे। वहां तैनात पुलिस कर्मियों के साथ उनकी हाथापाई हुई। दोनों मंत्रियों को बेंगलुरु पुलिस ने हिरासत में ले लिया।

गौरतलब है कि कर्नाटक में भाजपा की सरकार है। कांग्रेस का आरोप है कि बेंगलुरु के रिसोर्ट में विधायकों को बंधक बनाकर रखा गया है। एक विधायक के पिता वहां पहुंचे तो उनसे भी दुर्व्यवहार किया गया। भोपाल में मध्य प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष ने छह विधायकों को उनके घर के पते पर नोटिस भेजा है। इससे पहले वह छह मंत्रियों को नोटिस भेज चुके हैं।

नोटिस मिलने के बाद सदस्यों को विधानसभा में उपस्थित होना आवश्यक है। उन्हें खुलासा करना होगा कि वे पार्टी से बगावत कर रहे हैं या उन पर किसी तरह का दबाव है। बहरहाल पोजीशन यह है कि कमलनाथ सरकार इतनी आसानी से नहीं गिरेगी, जैसा कि हंगामा मचा हुआ है। अभी कई तरह के दावपेच चलेंगे।

अगर उठापटक मुकम्मल हुई तो नई सरकार बनने में कम से कम एक महीना लगेगा। एक अत्यंत क्षीण संभावना यह भी बनी हुई है कि कमलनाथ सरकार बच जाए।

2 thoughts on “मप्र में उठापटक जारी, नई सरकार बनना इतना आसान नहीं

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