प्रशांत ने नीतिश खिलाफ खोला मोर्चा

पटना। राजनीतिक रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने अभी तुरंत राजनीतिक दल बना कर बिहार की राजनीति में किस्मत आजमाने की बजाय पहले बिहार का एजेंडा चलाने का फैसला किया है। उन्होंने ऐलान किया है कि ‘बात बिहार की’ नाम से वे एक कार्यक्रम चलाएंगे, जिसके तहत बिहार के दस लाख नौजवानों को इससे जोड़ा जाएगा। इस अभियान के क्रम में ही वे पार्टी भी बना सकते हैं।उन्होंने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के विकास मॉडल पर भी सवाल उठाया और कहा कि नीतीश के 15 साल के राज में भी बिहार जस का तस रहा।

जनता दल यू से निकाले जाने के 20 दिन के बाद प्रशांत किशोर ने मंगलवार को पटना में प्रेस कांफ्रेंस की और सभी मसलों पर खुल कर बोले। उन्होंने कहा कि 2005 में जब लालू प्रसाद की पार्टी सत्ता से बाहर हुई थी तब भी बिहार देश का सबसे पिछड़ा राज्य था और 15 साल के नीतीश कुमार के शासन के बाद आज भी सबसे पिछड़ा राज्य है। उन्होंने शिक्षा, स्वास्थ्य जैसे कई मानकों पर देश में बिहार की रैंकिंग बताई और कहा कि बिहार आज भी उसी तरह पिछड़ा राज्य है, जैसे 15 साल पहले था।

प्रशांत किशोर ने विचारधारा को लेकर भी नीतीश कुमार पर सवाल उठाया और आरोप लगाया कि वे विचारधारा से समझौता करके भाजपा के साथ बने हुए हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा- नीतीश कुमार पहले बिहार की शान थे, बिहार के लोगों के नेता थे। आज उनके 16 सांसद हैं पर गुजरात का कोई नेता बताता है कि आप ही नेता बने रहिए। बिहार का मुख्यमंत्री यहां के लोगों का नेता है, आन-शान है, कोई मैनेजर नहीं है। हम लोग सशक्त नेता चाहते हैं, जो पूरे भारत और बिहार के लिए अपनी बात कहने के लिए किसी का पिछलग्गू ना बने।

नीतीश पर विचारधारा से समझौता करने का आरोप लगाते हुए पीके ने कहा कि नीतीश कुमार को यह बताना चाहिए कि वे महात्मा गांधी और नाथूराम गोडसे के साथ एक साथ कैसे खड़े रह सकते हैं। उन्होंने कहा- नीतीश जी हमेशा कहते हैं कि वो गांधी, जेपी और लोहिया के आदर्शों को नहीं छोड़ सकते। फिर वे उन लोगों के साथ कैसे रह सकते हैं जो कि गोडसे की विचारधारा का समर्थन करते हैं। दोनों एक साथ नहीं चल सकते। अगर आप भाजपा के साथ खड़े रहना चाहते हैं, तो मुझे इससे कोई दिक्कत नहीं है लेकिन आप दोनों तरफ तो नहीं रह सकते।

पीके ने कहा- इस मुद्दे पर मेरे और नीतीश जी के बीच काफी चर्चा हुई है। उनके अपने विचार हैं जबकि मेरे अपने। मेरे और मुख्यमंत्री के बीच इस बात को लेकर मतभेद हैं कि गांधी और गोडसे के विचार एक साथ खड़े नहीं हो सकते। दल का नेता होने के नाते आपको यह बताना होगा कि आप किस तरफ हैं। नीतीश की शासन प्रणाली पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि बिहार 15 साल पहले जितना पिछड़ा हुआ था आज भी उतना ही पिछड़ा हुआ है।

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